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जेएनयू जैसे विश्वविद्यालयों के लिए CUET पर संसदीय समिति ने उठाए सवाल, बताई समीक्षा की जरूरत

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए लागू की गई कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) व्यवस्था पर दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। समिति का मानना है कि बहुविकल्पीय प्रश्नों पर आधारित प्रवेश परीक्षा मानविकी और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं है। इससे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) जैसे संस्थानों की विशिष्ट शैक्षणिक तथा सामाजिक आवश्यकताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

Published: 12:15pm, 18 Jun 2026

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए लागू की गई कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) व्यवस्था पर दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। समिति का मानना है कि बहुविकल्पीय प्रश्नों पर आधारित प्रवेश परीक्षा मानविकी और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं है। इससे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) जैसे संस्थानों की विशिष्ट शैक्षणिक तथा सामाजिक आवश्यकताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

राज्यसभा में पेश अपनी 381वीं रिपोर्ट में समिति ने कहा कि सीयूईटी लागू होने के बाद से कई विश्वविद्यालयों और शिक्षक संगठनों ने इसकी आलोचना की है। उनका तर्क है कि बहुविकल्पीय प्रश्नों पर आधारित परीक्षा छात्रों की विश्लेषणात्मक क्षमता, अभिव्यक्ति कौशल और स्वतंत्र चिंतन का समुचित मूल्यांकन नहीं कर पाती। इसके अलावा परीक्षा और परिणामों में होने वाली देरी से शैक्षणिक कैलेंडर भी प्रभावित हुआ है।

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने विशेष रूप से जेएनयू का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की पुरानी प्रवेश प्रणाली सामाजिक-आर्थिक और क्षेत्रीय विविधता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकसित की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट एक समान प्रवेश प्रक्रिया उपलब्ध कराता है, लेकिन जेएनयू जैसे विशेष वैधानिक दायित्व वाले विश्वविद्यालयों की सभी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है। समिति ने सीयूईटी के प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता और परीक्षा की रूपरेखा की समीक्षा की सिफारिश की है।

रिपोर्ट में जेएनयू में शिक्षकों की पदोन्नति में हो रही देरी पर भी चिंता जताई गई है। समिति के अनुसार बड़ी संख्या में पात्र शिक्षक वर्षों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। इसके साथ ही सेंट स्टीफंस कॉलेज से जुड़े विवादों के शीघ्र समाधान और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में छात्रों की सामाजिक व क्षेत्रीय पृष्ठभूमि संबंधी वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने की भी सिफारिश की गई है। समिति ने ऐतिहासिक महत्व वाले सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के लिए विशेष सहायता कार्यक्रम शुरू करने का सुझाव भी दिया है।

YuvaSahakar Team