Trending News

PM नरेंद्र मोदी कल गुजरात-महाराष्ट्र दौरे पर, कई विकास परियोजनाओं की देंगे सौगात दिल्ली: सत्य निकेतन PG हादसे में बढ़ा मौत का आंकड़ा, अब तक 7 शव बरामद यूपी में निकली कंप्यूटर ऑपरेटर की भर्ती, आवेदन आज से करें, मिलेगी 81000 सैलरी तिब्बत में आई बाढ़ से चीन में भी भारी तबाही, अब तक 43 मौतें, 519 लोग लापता हरमनप्रीत कौर सबसे ज्यादा T20 मैचों की कप्तानी का रिकॉर्ड बनाया बागपत में दर्दनाक हादसा, श्रद्धालुओं से भरी बस पलटी, 4 लोगों की मौत PM नरेंद्र मोदी कल गुजरात-महाराष्ट्र दौरे पर, कई विकास परियोजनाओं की देंगे सौगात दिल्ली: सत्य निकेतन PG हादसे में बढ़ा मौत का आंकड़ा, अब तक 7 शव बरामद यूपी में निकली कंप्यूटर ऑपरेटर की भर्ती, आवेदन आज से करें, मिलेगी 81000 सैलरी तिब्बत में आई बाढ़ से चीन में भी भारी तबाही, अब तक 43 मौतें, 519 लोग लापता हरमनप्रीत कौर सबसे ज्यादा T20 मैचों की कप्तानी का रिकॉर्ड बनाया बागपत में दर्दनाक हादसा, श्रद्धालुओं से भरी बस पलटी, 4 लोगों की मौत

समुद्री जल से यूरेनियम निकालने की नई तकनीक, IISc को बड़ी सफलता

भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बंगलूरू के शोधकर्ताओं ने समुद्री जल से यूरेनियम को अधिक प्रभावी तरीके से अलग करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है

New IISc Study Opens Path for Uranium Recovery and Groundwater Purification


Published: 15:16pm, 07 Sep 2026

भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बंगलूरू के शोधकर्ताओं ने समुद्री जल से यूरेनियम को अधिक प्रभावी तरीके से अलग करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। वैज्ञानिकों ने ऐसी विशेष स्लिप्ड सहसंयोजक कार्बनिक ढांचा (COF) झिल्लियों का अध्ययन किया है, जो यूरेनियम के ऑक्साइड आयनों को रोक सकती हैं, जबकि समुद्री जल में मौजूद अन्य सामान्य आयनों को गुजरने देती हैं।

यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि परमाणु ऊर्जा के लिए यूरेनियम प्रमुख ईंधन है। उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक भूमि पर करीब 75 लाख टन यूरेनियम मौजूद है, जबकि समुद्री जल में इसकी अनुमानित मात्रा करीब 450 करोड़ टन है। ऐसे में समुद्र भविष्य में यूरेनियम का बड़ा वैकल्पिक स्रोत बन सकता है।

समुद्री जल से यूरेनियम निकालना आसान नहीं है, क्योंकि इसमें अनेक प्रकार के आयन बहुत अधिक मात्रा में मौजूद होते हैं। अब तक विकसित कई तकनीकें यूरेनियम को मजबूत रासायनिक बंधनों के जरिए पकड़ने का प्रयास करती रही हैं, लेकिन IISc की नई तकनीक झिल्ली की नैनोस्तरीय संरचना और आयनों की आवाजाह को नियंत्रित करने पर आधारित है।

शोधकर्ताओं ने आणविक स्तर पर आयनों की जलयोजन संरचना, मुक्त-ऊर्जा अवरोध और झिल्ली से उत्पन्न घर्षण का अध्ययन किया। पाया गया कि COF की परतों को विशेष तरीके से खिसकाने पर ऐसी सूक्ष्म संरचना बनती है, जो यूरेनियम आयनों को प्रभावी रूप से रोक सकती है।

इस तकनीक का उपयोग केवल परमाणु ईंधन के लिए ही नहीं, बल्कि भूजल से यूरेनियम प्रदूषण हटाने में भी किया जा सकता है। इससे पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों के समाधान की नई संभावनाएं खुल सकती हैं।

यह शोध योगेंद्र कुमार और बीनू वर्गीज ने प्रोफेसर प्रबल के. मैती के मार्गदर्शन में किया है, जिसमें एक्सेंचर लैब्स, बंगलूरू ने भी सहयोग दिया।

Jitendra