केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) 2025-26 रिपोर्ट ने देश की स्कूली शिक्षा में कई सकारात्मक बदलाव दर्ज किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले चार वर्षों में शिक्षकों की संख्या लगातार बढ़ी है और छात्र-शिक्षक अनुपात में भी सुधार हुआ है।
देश में शिक्षकों की संख्या 2022-23 के 94.83 लाख से बढ़कर 2025-26 में 1.02 करोड़ से अधिक हो गई है। चार वर्षों में इसमें करीब 8.3% की वृद्धि दर्ज की गई। प्राथमिक स्तर पर अब प्रति शिक्षक औसतन 10 छात्र हैं, जबकि 2022-23 में यह संख्या 11 थी। प्रिपरेटरी स्तर पर छात्र-शिक्षक अनुपात 14 से घटकर 12, मिडिल में 18 से 17 और सेकेंडरी स्तर पर 23 से घटकर 21 हो गया है। सभी स्तरों पर यह अनुपात राष्ट्रीय शिक्षा नीति में निर्धारित 30:1 की सीमा के भीतर है।
ड्रॉपआउट के आंकड़ों में भी बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। प्रिपरेटरी स्तर पर ड्रॉपआउट दर 2022-23 के 8.7% से घटकर 2025-26 में 1.8% रह गई है। सेकेंडरी स्तर पर यह 13.8% से घटकर 7% हो गई। हालांकि मिडिल स्कूल में ड्रॉपआउट दर पिछले साल के 3.5% से मामूली बढ़कर 3.6% हुई है।
सेकेंडरी स्तर पर रिटेंशन 47.2% से बढ़कर 51.9% और मिडिल स्तर पर 82.8% से बढ़कर 83.7% हुआ है। सेकेंडरी ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो भी 68.5% से बढ़कर 71.7% पहुंच गया। विभिन्न स्तरों के बीच ट्रांजिशन रेट भी पिछले चार वर्षों के उच्चतम स्तर पर हैं।
स्कूलों की सुविधाओं में भी सुधार हुआ है। कंप्यूटर सुविधा वाले स्कूलों का अनुपात 47.7% से बढ़कर 69.9% और इंटरनेट सुविधा 49.7% से बढ़कर 67.4% हो गई है। 95% स्कूलों में बिजली और 99.5% में पेयजल उपलब्ध है। सिंगल-टीचर स्कूलों की संख्या घटकर 1,00,843 रह गई है।
हालांकि खेल मैदान वाले स्कूलों का अनुपात 83% से घटकर 81.9% हुआ है। वहीं दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए रैंप और हैंडरेल की सुविधा बढ़कर 58.2% स्कूलों तक पहुंची है। रिपोर्ट के मुताबिक देश के कुल शिक्षकों में महिलाओं की हिस्सेदारी भी बढ़कर 54.9% हो गई है।


