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मत्स्य सहकारी समितियों में तकनीक से मछुआरों के जीवन में आएगा बदलाव

मत्स्य सहकारी समितियों में तकनीक के प्रयोग से मछुआरों के जीवन में बदलाव आना तय माना जा रहा है। देश में फिलहाल मत्स्य सहकारी समितियों की उत्साहजनक संख्या नहीं है, जिसे बढ़ाने पर सरकार का पूरा जोर है। प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों की तर्ज पर मत्स्य सहकारी समितियों को भी कंप्यूटर से लैस किया जाएगा ताकि उन्हें हर संभव मदद उपलब्ध कराई जा सके। मत्स्य सहकारी समितियों को बैंक मित्र भी नियुक्त किया जा रहा है। समिति के सदस्य मछुआरों को रूपे किसान क्रेडिट कार्ड भी सौंपा जा रहा है।

Published: 08:00am, 26 Jan 2025

केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की पहल पर प्राथमिक कृषि ऋण समिति (पैक्स) की तर्ज पर मत्स्य सहकारी समितियां भी अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर सकेंगी। यह अधिकार उन्हें राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में मॉडल बायलॉज के लागू होने के बाद प्राप्त हुआ है। मत्स्य सहकारी समितियों में तकनीक के प्रयोग से मछुआरों के जीवन में बदलाव आना तय माना जा रहा है। देश में फिलहाल मत्स्य सहकारी समितियों की उत्साहजनक संख्या नहीं है, जिसे बढ़ाने पर सरकार का पूरा जोर है। प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों की तर्ज पर मत्स्य सहकारी समितियों को भी कंप्यूटर से लैस किया जाएगा ताकि उन्हें हर संभव मदद उपलब्ध कराई जा सके। मत्स्य सहकारी समितियों को बैंक मित्र भी नियुक्त किया जा रहा है। समिति के सदस्य मछुआरों को रूपे किसान क्रेडिट कार्ड भी सौंपा जा रहा है।

राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस के अनुसार वर्तमान में देश में प्राथमिक मत्स्य सहकारी समितियों की संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है। केंद्र सरकार ने फरवरी 2023 में सहकारिता आंदोलन को मजबूत बनाने और जमीनी स्तर तक इसकी पहुंच बढ़ाने के लिए एक योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत देश में मत्स्य सहकारी समितियों का गठन करना है। अगले पांच वर्षों में देश के सभी पंचायतों व गांवों को शामिल करते हुए वहां नई बहुउद्देशीय पैक्स,  डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों की स्थापना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मछुआरों के बाजार लिंकेज और और मत्स्य प्रसंकरण की सुविधाओं के लिए एनसीडीसी के सहयोग से मत्स्य किसान संगठन (एफएफपीओ) का गठन किया जा रहा है। इसके पहले चरण में 69 एफएफपीओ का गठन कर लिया गया है। मत्स्य पालन विभाग ने एनसीडीसी को 255 करोड़ रुपए की लागत से कुल 1000 एफएफपीओ के गठन का दायित्व सौंपा है।

देश में राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी), पीएम मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) सहित भारत सरकार की विभिन्न मौजूदा योजनाओं को राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी), राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) और राज्य सरकारों के सहयोग से एकीकृत किया जाएगा। भारत की ज्यादा अंतरराष्ट्रीय सीमाएं समुद्र से घिरी हैं, जिसमें मत्स्य पालन की अपार संभावनाएं है। इसका पर्याप्त दोहन अभी तक नहीं हो पा रहा है, जबकि समुद्र तटीय क्षेत्रों में मछुआरों की बड़ी आबादी निवास करती है। उनके जीवन में सुधार लाने के उद्देश्य से सहकारिता को माध्यम बनाया गया है। मत्स्य सहकारी समितियों के डिजिटल हो जाने और समुद्र में मछली पकड़ने जाने वाले मछुआरों को संचार के आधुनिक तकनीक से लैस करने से काफी सहूलियत होगी।

घरेलू स्तर पर मछलियों की भारी मांग है। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारतीय मछलियों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसे पूरा करने की दिशा में लगातार प्रयास जारी है। अंतरराज्यीय स्तर पर भी झीलें, नदियां, नहरें और पोखर, तालाबों की भारी संख्या है, जिसमें मछली पालन की भारी संभावना है। इन्हीं अवसरों का लाभ उठाते हुए सरकार ने सहकारी क्षेत्र के माध्यम से समाज के निचले हिस्से में जीवनयापन करने वाले मछुआरों को सहकारिता से जोड़ने का संकल्प लिया है।

देश में फिलहाल 25,660 मत्स्य सहकारी समिति हैं, जिनकी संख्या को और बढ़ाना है। देश में सबसे ज्यादा मत्स्य सहकारी समितियां 4,927 अकेले तेलंगाना में है, जबकि 3,307 मत्स्य सहकारी समितियां महाराष्ट्र में गठित की गई हैं। मध्य प्रदेश में 2,917, आंध्र प्रदेश में 1,951, छत्तीसगढ़ में इनकी संख्या 1,794 है। बड़ा राज्य होने के बावजूद उत्तर प्रदेश में मत्स्य सहकारी समितियों की संख्या मात्र 1,111 है। गुजरात में 680 मत्स्य सहकारी समितियां है। समुद्र तटीय राज्यों में मत्स्य सहकारी समितियों की संख्या को बढ़ाने पर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय ने पैक्स, मत्स्य और डेयरी सहकारी समितियों की संख्या को बढ़ाकर दो लाख से अधिक करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

YuvaSahakar Team

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