केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की दो दिवसीय 9वीं राष्ट्रीय समीक्षा कार्यशाला बस्तर में संपन्न हुई। इस अवसर पर सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने राज्यों से सहकारी क्षेत्र के विकास के लिए प्राथमिकता आधारित और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सहकारिता सुधारों का वास्तविक लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचना चाहिए।
आयोजित कार्यशाला का विषय ‘सहकार से समृद्धि: सहकारी परिवर्तन के माध्यम से प्रभाव का विस्तार’ था। इसमें विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, सहकारी समितियों के पंजीयक और राष्ट्रीय सहकारी संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
डॉ. भूटानी ने कहा कि देश के सभी राज्यों के लिए एक समान विकास मॉडल प्रभावी नहीं हो सकता। स्थानीय जरूरतों के अनुसार रणनीति तैयार करने और सफल मॉडल अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ और ओडिशा के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सहकारिता विस्तार पर जोर दिया।
कार्यशाला में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के विस्तार, सहकारी बैंकिंग, डेयरी, डिजिटल सेवाओं और अनाज भंडारण पर चर्चा हुई। अगले दो से तीन वर्षों में लगभग 95 हजार नई पैक्स समितियां स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। डॉ. भूटानी ने पैक्स कंप्यूटरीकरण के पहले चरण के लंबित कार्य दिसंबर 2026 तक पूरे करने और वित्तीय वर्ष 2024-25 तथा 2025-26 के ऑडिट अक्टूबर 2026 तक संपन्न करने के निर्देश दिए।
सहकारी बैंकों में साइबर सुरक्षा, आधुनिक कोर बैंकिंग प्रणाली और मोबाइल बैंकिंग सेवाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। साथ ही किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य उपलब्ध कराने के लिए सहकारी विपणन तथा विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण को बढ़ावा देने की बात कही गई।
कार्यशाला में दुग्ध उत्पादकों को संगठित डेयरी सहकारी समितियों से जोड़ने पर भी बल दिया गया। अगली राष्ट्रीय समीक्षा कार्यशाला जनवरी 2027 में तमिलनाडु के महाबलीपुरम में प्रस्तावित है।


