उत्तर प्रदेश के शासकीय सहायता प्राप्त यानी एडेड माध्यमिक विद्यालयों में प्रवक्ता (पीजीटी) के 2615 पदों पर भर्ती की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) को पत्र भेजकर इस भर्ती में बीएड की अनिवार्यता और परास्नातक में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक की शर्त से एक बार के लिए छूट देने का अनुरोध किया है। अब अभ्यर्थियों की नजर एनसीटीई के निर्णय पर टिकी है।
पीजीटी भर्ती के लिए बीएड को अनिवार्य करने और पीजी में कम से कम 50 प्रतिशत अंक की शर्त लागू करने के संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने शासन को नियमावली में संशोधन का प्रस्ताव भेजा था। प्रस्ताव की जानकारी मिलने के बाद अभ्यर्थियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। प्रयागराज में कई अभ्यर्थी आमरण अनशन पर भी बैठ गए। उनका कहना था कि वर्षों से चली आ रही भर्ती प्रक्रिया के बीच अचानक नई शैक्षिक अर्हताएं लागू करने से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी भर्ती से बाहर हो जाएंगे।
22 सितंबर को लखनऊ में एडेड माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित करने के कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी को एनसीटीई को पत्र भेजने के निर्देश दिए थे। इसके बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग ने एनसीटीई को औपचारिक पत्र भेजकर दोनों शर्तों में एक बार की छूट देने का अनुरोध किया है।
पीजी में 50 प्रतिशत अंक की शर्त करीब एक दशक पहले निर्धारित की गई थी, लेकिन उत्तर प्रदेश में इसे अब तक लागू नहीं किया गया था। इसी प्रकार पीजीटी के लिए बीएड अनिवार्य करने का प्रस्ताव भी अब सामने आया है। यदि एनसीटीई दोनों अर्हताओं में एक बार की छूट देता है, तो 2615 पदों की भर्ती पुराने नियमों के अनुसार कराई जा सकेगी। इससे नई शर्तों के कारण पात्रता से बाहर हो रहे अभ्यर्थियों को भी प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा।


