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सहकार से समृद्धि : गुजरात में अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष-2025 पर भव्य सम्मेलन

सम्मेलन में जीसीएमएमएफ चेयरमैन अशोक चौधरी सहित अन्य सहकारी नेताओं ने गुजरात की सहकारी मॉडल की सराहना की। उन्होंने बताया कि पैक्स (PACS) का कंप्यूटरीकरण और माइक्रो-एटीएम जैसी पहलें ग्रामीण समुदायों को सशक्त बना रही हैं।

Published: 14:48pm, 21 Aug 2025

अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष-2025 के अवसर पर बुधवार को गुजरात में “सहकार से समृद्धि” थीम पर एक भव्य सहकारी सम्मेलन आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस सम्मेलन का उद्घाटन किया, जिसमें राज्य के सहकारिता क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख नेताओं ने भाग लिया।

सम्मेलन में गुजरात विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी, सहकारिता मंत्री जगदीश विश्वकर्मा, इफको व एनसीयूआई के चेयरमैन दिलीपभाई सांघानी, जीसीएमएमएफ चेयरमैन अशोक चौधरी, जीएससी बैंक चेयरमैन अजय पटेल, जयेन मेहता सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अपने मुख्य संबोधन में कहा कि सहकारिताएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत-2047” के विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने सहकारी संस्थाओं से “वोकल फॉर लोकल, लोकल टू ग्लोबल” के मंत्र को अपनाने का आह्वान किया और बताया कि भारत सरकार ने नई सहकारिता नीति-2025 लागू की है। साथ ही, आनंद में देश का पहला त्रि-भुवन सहकारी विश्वविद्यालय स्थापित किया जा रहा है, जो सहकारी क्षेत्र के लिए कुशल जनशक्ति तैयार करेगा।

गुजरात विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी ने “सबका साथ, सबका विकास” की भावना से राज्य की समावेशी प्रगति के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। वहीं, सहकारिता मंत्री जगदीश विश्वकर्मा ने कहा कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में कम समय में सहकारिता क्षेत्र में 60 से अधिक परिवर्तनकारी पहलें की गई हैं।

सम्मेलन में जीसीएमएमएफ चेयरमैन अशोक चौधरी सहित अन्य सहकारी नेताओं ने गुजरात की सहकारी मॉडल की सराहना की। उन्होंने बताया कि पैक्स (PACS) का कंप्यूटरीकरण और माइक्रो-एटीएम जैसी पहलें ग्रामीण समुदायों को सशक्त बना रही हैं।

वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (PACS) किसानों, पशुपालकों और महिलाओं को सहकारी गतिविधियों से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रही हैं और “स्वदेशी से आत्मनिर्भर भारत” के सपने को साकार कर रही हैं।

सम्मेलन का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि गुजरात की सहकारी आंदोलन किसानों, महिलाओं और ग्रामीण उद्यमियों को सशक्त बनाता रहेगा और भारत को आत्मनिर्भरता व वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर करने में स्तंभ बनेगा।

Diksha

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