देश में प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इंफोसिस के सह-संस्थापक और परीक्षा सुधारों के लिए गठित उच्चस्तरीय कार्यबल के अध्यक्ष नंदन नीलेकणि ने कहा कि तकनीक और व्यवस्थागत सुधारों के जरिए प्रश्नपत्र लीक होने के जोखिम को कम किया जा सकता है।
एक कार्यक्रम में नीलेकणि ने कहा कि प्रश्नपत्र पहले से तैयार होने पर उसके लीक होने और अवैध रूप से बेचे जाने की आशंका बनी रहती है। इससे निपटने के लिए प्रश्नों का एक व्यापक डिजिटल भंडार विकसित किया जा सकता है, जिसकी सहायता से परीक्षा के दिन अंतिम समय में प्रश्नपत्र तैयार किया जा सके।
एआई की मदद से परीक्षा वाले दिन प्रश्नपत्र तैयार करने की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने इसे तकनीकी रूप से संभव बताया। हालांकि, इस व्यवस्था को लागू करने के संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय या समयसीमा घोषित नहीं की गई है।
नीलेकणि ने सभी परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित प्रणाली के अंतर्गत लाने के विकल्प पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि देश में लगभग डेढ़ लाख स्थानों पर कंप्यूटर आधारित परीक्षा की सुविधा उपलब्ध है। बड़े पैमाने पर इस प्रणाली को लागू करने के लिए परीक्षा केंद्रों की संख्या और तकनीकी बुनियादी ढांचे का विस्तार आवश्यक होगा। जुलाई में गठित उच्चस्तरीय कार्यबल परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ाने के उपायों का अध्ययन कर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, एआई आधारित प्रश्नपत्र निर्माण में प्रश्नों की गुणवत्ता, कठिनाई स्तर, निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल ये सुझाव संभावित सुधारों के रूप में सामने आए हैं, न कि लागू की जा चुकी व्यवस्था के रूप में।


