बिहार के विश्वविद्यालयों में पीएचडी दाखिले के नियम और सख्त कर दिए गए हैं। सभी विश्वविद्यालयों को पीएचडी ऑर्डिनेंस और पीएचडी रेगुलेशन 2026 के प्रावधानों के अनुरूप ही प्रवेश प्रक्रिया संचालित करने का निर्देश दिया गया है। लोकभवन ने विश्वविद्यालयों से लंबित दाखिला प्रक्रिया जल्द पूरी करने और आगे से प्रवेश प्रक्रिया तय समयसीमा में संपन्न कराने को कहा है।
नेट की पात्रता को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है। जिस वर्ष किसी अभ्यर्थी ने नेट उत्तीर्ण किया है, उसे उसी वर्ष के पीएचडी दाखिला चक्र के लिए पात्र माना जाएगा। उदाहरण के लिए 2024 सत्र के लिए नेट-2024 उत्तीर्ण अभ्यर्थी ही पात्र होंगे। नेट योग्यता और उसके वेटेज का निर्धारण पीएचडी रेगुलेशन 2026 के अनुसार किया जाएगा।
विश्वविद्यालयों को 2024, 2025 और 2026 के पीएचडी दाखिले से संबंधित विज्ञापन जल्द जारी कर लंबित प्रवेश प्रक्रिया को नियमित करने का निर्देश दिया गया है। शोध की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए किसी एक दाखिला चक्र में उपलब्ध रिक्त सीटों की एक-तिहाई से अधिक सीटें नहीं भरी जाएंगी। हालांकि 2026 सत्र तक अधिकतम दो-तिहाई रिक्त सीटों पर प्रवेश की अनुमति होगी।
नई व्यवस्था के तहत विश्वविद्यालयों में चल रहे शोध की जानकारी भी सार्वजनिक की जाएगी। सभी पीएचडी शोध विषय विश्वविद्यालयों की वेबसाइट पर अपलोड होंगे, ताकि एक ही विषय पर दोहराव को रोका जा सके। इसके साथ ही शोध गाइडों के नाम, उनके विषय, उनके अधीन पंजीकृत शोधार्थियों की संख्या और शोध विषयों की जानकारी भी सार्वजनिक करनी होगी।
यह व्यवस्था शोध में पारदर्शिता बढ़ाने और छात्रों को बेहतर जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लागू की जा रही है। नई प्रणाली वर्ष 2025 के पैट से प्रभावी होगी।


