बच्चों और युवाओं में बढ़ते मानसिक तनाव, अवसाद और आत्महत्या की प्रवृत्ति को देखते हुए ओडिशा सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों से लेकर स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों तक के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP जारी की है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान करना और उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है।
नई व्यवस्था में शिक्षकों और कर्मचारियों को बच्चों के साथ व्यवहार में विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। किसी छात्र को ‘आलसी’, ‘जिद्दी’ या अन्य अपमानजनक शब्दों से संबोधित करने पर रोक लगाई गई है। सार्वजनिक रूप से अपमानित करने और हीन भावना पैदा करने वाली भाषा से भी बचने के निर्देश दिए गए हैं।
SOP के अनुसार यदि किसी बच्चे में लगातार उदासी, भय, चिड़चिड़ापन, हिंसक व्यवहार या अन्य असामान्य लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक दिखाई दें तो इसे गंभीर संकेत माना जाएगा। ऐसे विद्यार्थियों को पहचानकर परामर्श, निगरानी और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ के पास रेफर किया जाएगा।
मानसिक स्थिति के आधार पर बच्चों को ग्रीन, येलो और रेड श्रेणी में बांटकर देखभाल की व्यवस्था की जाएगी। परीक्षा के तनाव को कम करने के लिए 25 मिनट पढ़ाई के बाद पांच मिनट के विश्राम, गहरी सांस लेने के अभ्यास और नियमित नींद की सलाह भी दी गई है।
विश्वविद्यालयों में रैगिंग, भेदभाव, नशाखोरी, घर से दूर रहने और संबंधों से जुड़े तनाव के लिए मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र स्थापित करने की सिफारिश की गई है।
सरकार को उम्मीद है कि नई SOP से बच्चों और युवाओं को समय पर सहयोग मिलेगा और शैक्षणिक संस्थानों में अधिक सुरक्षित व संवेदनशील वातावरण तैयार होगा।


