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चीनी उत्पादन में गिरावट, NFCSF ने जारी किए आंकड़े, कीमतों में उछाल की आशंका

इस बार चीनी का रिकवरी रेट भी कम हुआ है। 31 मार्च 2025 तक देश का औसत रिकवरी रेट 9.37 फीसदी दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल यह 10.15 फीसदी था।

इस स्थिति से चीनी मिलों और किसानों दोनों के सामने चुनौतियां बढ़ गई हैं। आने वाले महीनों में उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष प्रयासों की जरूरत होगी।


Published: 15:18pm, 03 Apr 2025

राष्ट्रीय सहकारी चीनी फैक्ट्री महासंघ (एनएफसीएसएफ) ने 2024-25 चीनी सीजन के लिए 31 मार्च 2025 तक के उत्पादन आंकड़े जारी किए हैं। इस बार चीनी उत्पादन में पिछले साल की तुलना में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है। महासंघ के अनुसार, इस सीजन में अब तक देशभर की 113 चीनी मिलों में गन्ने की पेराई का काम जारी है। 31 मार्च तक कुल 2653.26 लाख टन गन्ने की पेराई हुई, जिससे 248.50 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ। पिछले साल इसी अवधि में 204 चीनी मिलें सक्रिय थीं और 2981.04 लाख टन गन्ने की पेराई से 302.50 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। इस तरह, इस साल गन्ने की पेराई और चीनी उत्पादन दोनों में कमी आई है।

इसके साथ ही, चीनी की रिकवरी रेट में भी गिरावट दर्ज की गई है। इस साल 31 मार्च तक औसत रिकवरी रेट 9.37 प्रतिशत रहा, जबकि पिछले साल यह 10.15 प्रतिशत था। रिकवरी रेट में यह कमी चीनी उत्पादन पर सीधा असर डाल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि रिकवरी रेट में कमी के कारण उत्पादन लक्ष्य को हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में भी उत्पादन घटा है। महाराष्ट्र में 843.16 लाख टन गन्ने की पेराई से 80.10 लाख टन चीनी बनी। उत्तर प्रदेश में 904.12 लाख टन गन्ने से 87.70 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ। वहीं, कर्नाटक में 469.41 लाख टन गन्ने से 39.90 लाख टन चीनी तैयार की गई। इन तीनों राज्यों में पिछले साल की तुलना में उत्पादन में कमी देखी गई है।

उत्पादन में गिरावट के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, गन्ने की पैदावार में कमी, मौसम में अनियमित बदलाव और रिकवरी रेट का घटना प्रमुख वजहें हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में सूखे और अनियमित बारिश ने गन्ने की खेती को प्रभावित किया है, जिसका असर चीनी उद्योग पर पड़ा है। उत्तर प्रदेश में भी गन्ने की गुणवत्ता में कमी देखी गई। इस स्थिति से चीनी मिलों और किसानों दोनों के सामने चुनौतियां बढ़ गई हैं।

चीनी उत्पादन में गिरावट से चीनी की कीमतों में उछाल आ सकता है। सरकार और उद्योग विशेषज्ञ स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और भविष्य में उत्पादन को बढ़ाने के लिए रणनीति तैयार की जा रही है। किसानों को उन्नत तकनीक और बेहतर सुविधाएं देकर चीनी उत्पादन को बढ़ाने के प्रयास किए जा सकते हैं।

YuvaSahakar Desk

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