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मेक इन इंडिया से बदली इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटो सेक्टर की तस्वीर

देश में विनिर्माण को नई दिशा देने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘मेक इन इंडिया’ पहल ने 12 वर्ष पूरे कर लिए हैं

From Mobiles to Railways, India Strengthens Its Manufacturing Base


Published: 12:12pm, 28 Sep 2026

देश में विनिर्माण को नई दिशा देने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘मेक इन इंडिया’ पहल ने 12 वर्ष पूरे कर लिए हैं। 25 सितंबर 2014 को शुरू हुई इस योजना का लक्ष्य भारत को मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन और इनोवेशन का वैश्विक केंद्र बनाना था। बीते एक दशक से अधिक समय में इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, स्टील, फार्मा, मेडिकल डिवाइस और रेलवे जैसे क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है।

सबसे बड़ा बदलाव इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में दिखाई देता है। वर्ष 2014-15 में देश का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 13.11 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। मोबाइल फोन उत्पादन 18,900 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 6.3 लाख करोड़ रुपये हो गया। उत्पादन की मात्रा के आधार पर भारत अब दुनिया के बड़े मोबाइल फोन विनिर्माण केंद्रों में शामिल है।

स्टील और ऑटोमोबाइल क्षेत्र ने भी अपनी क्षमता बढ़ाई है। कच्चे स्टील का उत्पादन 2014-15 के 81.7 मिलियन टन से बढ़कर 2025-26 में 170 मिलियन टन पहुंच गया। वहीं वाहन उत्पादन 2024-25 में 31.03 मिलियन यूनिट तक पहुंचा। तिपहिया वाहनों में 71 प्रतिशत और यात्री एवं वाणिज्यिक वाहनों में 65 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

फार्मास्युटिकल उद्योग भी वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका मजबूत कर रहा है। 2025-26 में फार्मा उद्योग का सालाना टर्नओवर 5.08 लाख करोड़ रुपये और निर्यात 2.62 लाख करोड़ रुपये रहा। मेडिकल डिवाइस का घरेलू उत्पादन भी पांच वर्षों में करीब 48 प्रतिशत बढ़ा है।

रेलवे विनिर्माण में भी स्वदेशी क्षमता बढ़ी है। 2014-24 के दौरान 54,809 कोच बनाए गए, जबकि 2025-26 में 1,674 लोकोमोटिव का उत्पादन हुआ।

इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ‘मेक इन इंडिया’ अब केवल आयात कम करने की नीति तक सीमित नहीं है। इसका अगला चरण भारत को उच्च तकनीक, निर्यात आधारित और वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़े विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने पर निर्भर करेगा।

Jitendra