देश में स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में ज्यादा नमक, चीनी और फैट वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर 2020 से रोक है। हालांकि छह साल बाद भी यह स्पष्ट नहीं है कि किन खाद्य पदार्थों को इस दायरे में प्रतिबंधित माना जाए। अब भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने इसे स्पष्ट करने के लिए न्यूट्रिशन से जुड़े नए नियमों का ड्राफ्ट तैयार किया है।
नए प्रस्ताव के तहत किसी खाद्य पदार्थ पर केवल उसके नाम के आधार पर रोक नहीं लगेगी। पैकेट में मौजूद नमक, चीनी और फैट की मात्रा के आधार पर तय किया जाएगा कि उसे स्कूल और आसपास बेचा जा सकता है या नहीं। इसलिए फिलहाल चिप्स, बिस्किट, नमकीन या कोल्ड ड्रिंक की कोई अलग प्रतिबंधित सूची नहीं है।
खाद्य पदार्थों के मूल्यांकन में ICMR की प्रोसेसिंग आधारित तीन कैटेगरी भी महत्वपूर्ण होंगी। इनमें कम प्रोसेस्ड, मीडियम प्रोसेस्ड और ज्यादा प्रोसेस्ड यानी अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड शामिल हैं। केवल किसी उत्पाद में ऊपर से विटामिन या मिनरल मिलाने भर से उसे हेल्दी नहीं माना जाएगा।
जांच सिर्फ चिप्स-बिस्किट तक सीमित नहीं रहेगी। जूस, नारियल पानी, छाछ, लस्सी, चाय और कॉफी जैसे ड्रिंक्स में भी मिलाए गए नमक, चीनी और फैट सहित कुल न्यूट्रिशन प्रोफाइल देखा जा सकता है।
फिलहाल FSSAI ने स्कूलों के लिए कोई अनिवार्य हेल्दी मेन्यू या सैंपल फूड लिस्ट तय नहीं की है। ड्राफ्ट फाइनल होने के बाद प्रतिबंधित उत्पादों की स्थिति स्पष्ट होगी और स्कूल स्टाफ को ट्रेनिंग तथा गाइडेंस दी जाएगी। ईट राइट स्कूल कार्यक्रम अभी वॉलंटरी है और 50 मीटर नियम की निगरानी राज्यों के खाद्य सुरक्षा विभागों की जिम्मेदारी होगी।
दुनिया में भी ऐसी कोशिशें हैं। चिली, मलेशिया, श्रीलंका और मैक्सिको में स्कूलों के अंदर जंक फूड पर सख्ती है, जबकि ब्रिटेन में स्कूलों के आसपास नई फास्ट-फूड दुकानों और बच्चों को लक्षित जंक फूड विज्ञापनों पर स्थानीय स्तर पर नियंत्रण के उदाहरण मौजूद हैं।


