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रेशम क्षेत्र की सहकारी समितियों पर नए नियमों के उल्लंघन पर लगेगा जुर्माना

केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय ने केंद्रीय रेशम बोर्ड (न्यायनिर्णयन, जांच प्रक्रिया एवं जुर्माना लगाने की विधि) नियम, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं

Central Silk Board


Published: 17:10pm, 12 Oct 2026

केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय ने केंद्रीय रेशम बोर्ड (न्यायनिर्णयन, जांच प्रक्रिया एवं जुर्माना लगाने की विधि) नियम, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं।  इन नियमों के तहत रेशम क्षेत्र में कार्यरत सहकारी समितियों को भी नई न्यायनिर्णयन व्यवस्था के दायरे में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य केंद्रीय रेशम बोर्ड अधिनियम, 1948 के तहत निर्धारित प्रावधानों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में जांच और दंड निर्धारण की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है।

नए नियमों में प्रतिष्ठान की परिभाषा का विस्तार करते हुए कंपनियों, फर्मों, संघों, ट्रस्टों, संस्थानों और सहकारी समितियों सहित विभिन्न संगठनों को शामिल किया गया है। इससे रेशम उत्पादन, प्रसंस्करण और संबंधित गतिविधियों में कार्यरत सहकारी संस्थाएं भी निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के अंतर्गत आएंगी।

नियमों के अनुसार अधिकृत अधिकारी अधिनियम के तहत निर्दिष्ट उल्लंघनों के मामलों में शिकायत दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद न्यायनिर्णयन अधिकारी संबंधित मामले की जांच करेंगे। किसी प्रतिष्ठान के खिलाफ कार्रवाई से पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और उसे अपना पक्ष रखने तथा सुनवाई का उचित अवसर दिया जाएगा।

जुर्माने का निर्धारण करते समय उल्लंघन की प्रकृति, उसकी पुनरावृत्ति और संबंधित पक्षों को होने वाली कठिनाइयों के संतुलन जैसे पहलुओं पर विचार किया जाएगा। न्यायनिर्णयन अधिकारी के आदेश से असंतुष्ट प्रतिष्ठान 30 दिनों के भीतर निर्धारित अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील कर सकेंगे।

नियमों में जुर्माने की वसूली का प्रावधान भी किया गया है। निर्धारित समय पर जुर्माना जमा नहीं करने की स्थिति में संबंधित राशि की वसूली कलेक्टर के माध्यम से भू-राजस्व के बकाये के रूप में की जा सकेगी।

नई अधिसूचना रेशम क्षेत्र की सहकारी समितियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्हें स्पष्ट रूप से प्रतिष्ठानों की श्रेणी में रखा गया है। इससे संबंधित संस्थाओं के लिए वैधानिक अनुपालन, दस्तावेजी प्रक्रियाओं और जवाबदेही का महत्व बढ़ जाएगा।

Jitendra