राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी NCERT ने वित्तीय साक्षरता को स्कूली शिक्षा से जोड़ते हुए पहली बार कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में व्यक्तिगत आयकर को शामिल किया है। सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक ‘भारत और उससे बाहर समाज को समझना-भाग 2’ में छात्रों को आयकर की गणना, टैक्स स्लैब और व्यक्तिगत आय प्रबंधन की बुनियादी जानकारी दी जाएगी।
‘अपनी व्यक्तिगत आय का प्रबंधन करना’ शीर्षक वाले अध्याय में छात्रों को बताया गया है कि पैसे का बेहतर प्रबंधन बचपन से ही सीखना जरूरी है। नई आयकर व्यवस्था के तहत अलग-अलग स्लैब के आधार पर टैक्स की गणना को उदाहरणों के जरिए समझाया गया है। पुरानी कर व्यवस्था का इसमें उल्लेख नहीं है।
विषय को क्रमबद्ध तरीके से समझाने के लिए इसे नौ चरणों में पढ़ाया जा सकता है। शुरुआत आयकर, करदाता, असेसमेंट ईयर, फाइनेंशियल ईयर और निवास की स्थिति जैसी बुनियादी अवधारणाओं से होगी। इसके बाद पुरानी और नई कर व्यवस्था, टैक्स स्लैब और दोनों के बीच अंतर समझाया जाएगा।
अगले चरण में आय के पांच प्रमुख स्रोतों को शामिल किया जा सकता है। इनमें वेतन, मकान संपत्ति से आय, व्यवसाय या पेशे से आय, पूंजीगत लाभ और अन्य स्रोतों से आय शामिल हैं। छात्रों को मानक कटौती, HRA, गृह ऋण ब्याज, बैंक ब्याज और विभिन्न कर कटौतियों की जानकारी भी दी जा सकती है।
आगे कुल आय से कर योग्य आय निकालने, स्लैब के अनुसार टैक्स लगाने, धारा 87A की रिबेट, 4 प्रतिशत स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर, सरचार्ज, TDS और एडवांस टैक्स जैसी अवधारणाओं को समझाया जा सकता है।
अंतिम चरण में किसी व्यक्ति की पूरी आय का व्यावहारिक उदाहरण लेकर टैक्स गणना और ITR-1 तथा ITR-2 की बुनियादी जानकारी दी जा सकती है। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को कम उम्र से ही कर व्यवस्था और जिम्मेदार वित्तीय निर्णयों की समझ देना है।


