राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों को ‘ट्रिगर-1’ सूखा श्रेणी में रखा है। इसके तहत सिंचाई जल शुल्क में छूट, पेयजल आपूर्ति को प्राथमिकता, पशुओं के लिए चारा शिविर और कृषि ऋण की वसूली एवं पुनर्भुगतान में राहत सहित 12 रियायतों का प्रावधान है।
यवतमाल के नरसापुर गांव के किसान अशोक लांडगे के अनुसार, सामान्य वर्षों में उनके खेतों से 25 से 50 क्विंटल कपास का उत्पादन होता था, लेकिन इस बार केवल पांच से आठ क्विंटल उपज मिलने की आशंका है। चारे और पानी की कमी के कारण उन्हें चार गाय और दो भैंसें बेचनी पड़ीं। परिवार पर तीन लाख रुपये से अधिक का कृषि ऋण भी बकाया है।
इचोरा गांव के किसान नितिन नागोसे को पिछले वर्ष 25 क्विंटल कपास मिली थी, जबकि इस बार सात से आठ क्विंटल उत्पादन की उम्मीद है। आय घटने के कारण वह निर्माण कार्य में मजदूरी करने पर विचार कर रहे हैं। अन्य किसानों को भी कर्ज चुकाने और बच्चों की पढ़ाई जारी रखने की चिंता है।
इस बीच, केंद्र सरकार की अंतर-मंत्रालयी टीम 8 से 11 अक्टूबर तक प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान, जल संकट और किसानों की स्थिति का आकलन कर रही है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केंद्र से अधिकतम सहायता मिलने का भरोसा जताया है। राज्य सरकार ने राहत सूची से बाहर रह गए अन्य प्रभावित क्षेत्रों को भी सहायता देने पर विचार करने के संकेत दिए हैं।


