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NEET-PG में शून्य पर्सेंटाइल पर फिर छिड़ी बहस, मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता पर उठे सवाल

NEET-PG 2026 के नतीजों के बाद एक बार फिर मेडिकल पीजी दाखिलों में क्वालिफाइंग कटऑफ को लेकर बहस तेज हो गई है। 24 सितंबर को जारी परिणाम में कुल 2,63,535 उम्मीदवारों ने क्वालिफाई किया। परीक्षा देने वाले 258 उम्मीदवारों के अंक शून्य या उससे कम रहे, जबकि अंतिम रैंक यानी 0 पर्सेंटाइल वाले उम्मीदवार का स्कोर माइनस 59 रहा।

NEET-PG 2026


Published: 16:02pm, 07 Oct 2026

NEET-PG 2026 के नतीजों के बाद एक बार फिर मेडिकल पीजी दाखिलों में क्वालिफाइंग कटऑफ को लेकर बहस तेज हो गई है। 24 सितंबर को जारी परिणाम में कुल 2,63,535 उम्मीदवारों ने क्वालिफाई किया। परीक्षा देने वाले 258 उम्मीदवारों के अंक शून्य या उससे कम रहे, जबकि अंतिम रैंक यानी 0 पर्सेंटाइल वाले उम्मीदवार का स्कोर माइनस 59 रहा।

पिछले कुछ वर्षों के पैटर्न को देखते हुए सवाल उठ रहा है कि क्या खाली पीजी मेडिकल सीटों को भरने के लिए इस बार भी क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल घटाया जा सकता है। 2023 में कोविड के बाद पहली बार NEET-PG का कटऑफ 0 पर्सेंटाइल तक किया गया था, जिससे कम और नेगेटिव स्कोर वाले उम्मीदवार भी काउंसलिंग के पात्र बने थे।

कटऑफ घटाने के विरोध में डॉक्टर संगठनों और कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि बेहद कम स्कोर वाले उम्मीदवारों को MD, MS और DNB जैसे उच्च विशेषज्ञता वाले पाठ्यक्रमों में प्रवेश देना मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। उनका कहना है कि बार-बार पात्रता मानक घटाने से निजी मेडिकल कॉलेजों की महंगी सीटों को भरने को बढ़ावा मिल सकता है।

दूसरी ओर मेडिकल शिक्षकों का तर्क है कि NEET-PG स्कोर केवल प्रवेश की पात्रता तय करता है, डॉक्टर की अंतिम गुणवत्ता नहीं। डिग्री हासिल करने के लिए उम्मीदवार को निर्धारित प्रशिक्षण पूरा करना और विश्वविद्यालय की परीक्षाएं पास करना अनिवार्य है।

इस साल NEET-PG के लिए 2,73,096 उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया और 2,65,980 ने परीक्षा दी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पीजी मेडिकल सीटों की संख्या भी बढ़ी है। ऐसे में बहस अब केवल सीटें भरने की नहीं, बल्कि मेडिकल शिक्षा में अवसर और गुणवत्ता के बीच संतुलन बनाने की है।

Jitendra