AI ने कामकाज की रफ्तार बढ़ाने के साथ साइबर हमलों को भी कई गुना तेज कर दिया है। पहले किसी सिस्टम की कमजोरी खोजने और उस पर हमला करने में कई दिन लगते थे, लेकिन अब AI की मदद से यह प्रक्रिया कुछ घंटों में पूरी हो रही है।
माइक्रोसॉफ्ट की डिजिटल डिफेंस रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, भारत दुनिया के सात सबसे ज्यादा साइबर प्रभावित देशों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर ट्रैक किए गए साइबर खतरों में भारत की हिस्सेदारी 2.5% रही। बीते एक साल में रैनसमवेयर हमलों में पांच गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
साइबर अपराधी अब नए तरीकों से यूजर्स और कंपनियों को निशाना बना रहे हैं। ईमेल और PDF में भेजे जाने वाले QR कोड के जरिए फिशिंग तेजी से बढ़ी है। माइक्रोसॉफ्ट ने एक साल में करीब 14.5 करोड़ QR फिशिंग हमले पकड़े। वहीं फेक कैप्चा के जरिए यूजर से संदिग्ध कमांड कॉपी-पेस्ट करवाकर सिस्टम हैक करने के मामले करीब आठ गुना बढ़े हैं और 11 लाख डिवाइस पर ऐसी गतिविधियां मिलीं।
कंपनियों में बॉस, HR, पेरोल टीम, वेंडर या बिजनेस पार्टनर बनकर कर्मचारियों को निशाना बनाने के मामले भी बढ़े हैं। अप्रैल-जून 2026 के दौरान रिपोर्ट हुए 85% फिशिंग ईमेल में किसी व्यक्ति या संस्था की पहचान की नकल की गई थी। माइक्रोसॉफ्ट टीम्स पर वॉइस फिशिंग में एक साल में 502% की वृद्धि दर्ज की गई।
AI अब हमलों को ऑटोमेट करने की दिशा में भी बढ़ रहा है। लैब टेस्ट में AI एजेंटों ने मिलकर 32 चरणों वाला साइबर अटैक पूरा किया। सॉफ्टवेयर की कमजोरी सामने आने के बाद हमला शुरू होने का औसत समय भी घटकर 24 घंटे से कम रह गया है।
अगले दो साल में AI एजेंटों की संख्या 130 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में कंपनियों के सामने AI आधारित डिजिटल वर्कफोर्स को सुरक्षित रखना नई बड़ी साइबर चुनौती बनकर उभर रहा है।


