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कैबिनेट ने 23,731 करोड़ रुपये की गोबरधन योजना को दी मंजूरी

योजना के तहत जिला स्तर पर फीडस्टॉक की पहचान, कचरा संग्रह व्यवस्था, जैविक खाद के मूल्य संवर्धन, तकनीकी नवाचार और कौशल विकास के लिए सीबीजी इकोसिस्टम चैलेंज फंड भी स्थापित किया जाएगा

Cabinet Approves ₹23,731 Crore GOBARdhan Scheme to Boost Compressed Biogas Production


Published: 14:22pm, 07 Aug 2026

केंद्र सरकार ने देश में कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादन को तेजी से बढ़ाने के लिए गोबरधन राष्ट्रीय सर्कुलर बायोएनर्जी योजना को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना के लिए 23,731 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय को स्वीकृति दी। योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू की जाएगी।

गोबरधन योजना के तहत कृषि अवशेष, गोबर, प्रेस मड, नगर निकायों के जैविक कचरे और अन्य बायोमास संसाधनों को स्वच्छ ईंधन, जैविक खाद और आर्थिक आय में बदला जाएगा। सरकार का लक्ष्य देश में कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाना है। इससे आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होने के साथ ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

योजना में कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादकों के लिए सुनिश्चित खरीद, स्थिर मूल्य, पूंजी सहायता, पाइपलाइन कनेक्टिविटी, ऋण गारंटी और तकनीकी सहयोग का प्रावधान किया गया है। सीबीजी के लिए 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू का स्थिर प्रशासित मूल्य निर्धारित किया गया है, जिससे उत्पादकों को लंबे समय तक आय की स्पष्टता मिलेगी।

नई सीबीजी परियोजनाओं को स्थापित क्षमता के अनुसार प्रति टन प्रतिदिन अधिकतम दो करोड़ रुपये तक पूंजी सहायता दी जाएगी। उत्पादन क्षमता बढ़ाने वाली मौजूदा परियोजनाएं भी सहायता के लिए पात्र होंगी। इसके अलावा सीबीजी संयंत्रों को सिटी गैस वितरण नेटवर्क और मुख्य गैस पाइपलाइनों से जोड़ने के लिए बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा।

एमएसएमई आधारित परियोजनाओं के लिए विशेष ऋण गारंटी व्यवस्था भी बनाई जाएगी। इससे छोटे उद्यमियों, महिला उद्यमियों, सहकारी संस्थाओं और पहली बार परियोजना शुरू करने वाले निवेशकों को आसान वित्त उपलब्ध हो सकेगा।

योजना के तहत जिला स्तर पर फीडस्टॉक की पहचान, कचरा संग्रह व्यवस्था, जैविक खाद के मूल्य संवर्धन, तकनीकी नवाचार और कौशल विकास के लिए सीबीजी इकोसिस्टम चैलेंज फंड भी स्थापित किया जाएगा।

सरकार के अनुसार गोबरधन योजना से किसानों और ग्रामीण उद्यमियों की आय बढ़ेगी, निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी। यह योजना वेस्ट-टू-वेल्थ, आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है

Jitendra