केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को नई दिल्ली में सहकारिता मंत्रालय के 5वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सहकारिता मंत्रालय बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले ने देश के सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। इन पांच वर्षों में सहकारिता मंत्रालय ने साबित कर दिया है कि सहकारिता मंत्रालय राज्यों के काम में दखल देने के लिए नहीं, बल्कि राज्यों की मदद करने के लिए, नीति निर्माण के लिए और उनके उत्कर्ष के लिए गठित बनाया गया है।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हमने जो बीज उत्पादन की सहकारी समिति बनाई है, वह तीन वर्ष बाद भारत की सबसे बड़ी गैर-सरकारी बीज उत्पादन कंपनी बन जाएगी। इसके माध्यम से किसानों को शुद्ध, बिना मिलावट वाला बीज उपलब्ध होगा, जिससे अधिक उत्पादन संभव हो सकेगा। हमने इसमें भारतीय बीजों के संरक्षण की व्यवस्था भी की है। केले और आलू के किसानों को आधुनिक तकनीक वाले बीज उपलब्ध कराने के लिए हमारी सहकारी समितियां हर राज्य में नया यूनिट शुरू करेंगी। इन यूनिट्स के माध्यम से टिश्यू कल्चर पौधे और अधिक पैदावार देने वाली, एक समान आकार वाली आलू की बीज नस्ल किसानों तक पहुंचेगी। इससे हम विश्व का चिप्स कारोबार भारत में ला सकेंगे। गुजरात में बनास डेरी ने इसकी बहुत अच्छी शुरुआत की है। हम उसी मॉडल को हर राज्य में पहुंचाकर केले, पपीते और आलू के बीजों को टिश्यू कल्चर और नई तकनीक के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने का काम करेंगे। कार्यक्रम के दौरान बीज प्रणालियों को सुदृढ़ करने के लिए BBSSL और ICAR के बीच समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए।
अमित शाह ने कहा कि हमने इन पांच वर्षों में समस्याओं की पहचान की है, संभावनाओं को तराशा है और राज्यों को भविष्यमुखी नीतियां भी उपलब्ध कराई हैं। पैक्स से लेकर एपेक्स तक, राज्य सरकारों से लेकर जिला स्तर के सहकारी संघों तक, हर स्तर पर व्यापक परामर्श के बाद हमने अपनी पहलों को परिणाम में बदला है। आज पूर्ण रूप से स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय सभी राज्यों और देशभर की 8 लाख 30 हजार सहकारी समितियों को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि पहले सहकारिता सीमित रूप से केवल प्राथमिक क्षेत्र तक ही थी। हमने कृषि ऋण, डेयरी, उर्वरक वितरण और ग्रामीण सेवाओं को प्राथमिक स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक जोड़ा है। साथ ही सेकेंडरी और टर्शियरी क्षेत्रों को भी इससे जोड़ने का कार्य किया है। भंडारण, उत्पादन, निर्यात, जैविक उत्पादन, परंपरागत बीजों का उत्पादन, उच्च उत्पादकता वाले बीजों का निर्माण, डिजिटल सेवाएं, बैंकिंग, मोबिलिटी, लॉजिस्टिक्स और हरित ऊर्जा – इन सभी क्षेत्रों को एक माला में पिरोने का काम पांच वर्षों में किया गया है।
सहकारिता मंत्री ने कहा कि मंत्रालय की पहल से आज राष्ट्रीय स्तर की तीन सहकारी समितियों के साथ मिलाकर कुल नौ राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समितियां बनाई गई हैं। इन नौ समितियों के माध्यम से देश से लेकर गांव तक सहकारिता को नौ अलग-अलग क्षेत्रों में पिरोया गया है। उन्होंने कहा कि जैसे इफको, कृभको, अमूल और एनडीडीबी ने सहकारिता आंदोलन की पहचान बनाई है और पूरे विश्व स्तर पर इसे प्रतिष्ठित किया है, उसी प्रकार हमारी नौ राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समितियाँ भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की बड़ी सहकारी समितियां बन जाएंगी।
अमित शाह ने कहा कि हमने बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम 2002 में 50 महत्वपूर्ण संशोधन करके पूरी सहकारी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और लोकतांत्रिक बनाया है। इन संस्थाओं के अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ कि इनका नेतृत्व सहकारिता से जुड़े लोगों के हाथ में था, लेकिन इनके प्रशासन व गवर्नेंस को पेशेवर ढंग से संचालित किया जाता है। इसी सफल मॉडल को अपनाने के उद्देश्य से त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी शुरू की गई। उन्होंने कहा कि त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी से बैंकिंग, डेयरी, विपणन, कृषि, उर्वरक तथा सहकारिता के अन्य क्षेत्रों के प्रशिक्षित पेशेवर तैयार होंगे। ये पेशेवर योग्यता के आधार पर नियुक्त होंगे। हमारा लक्ष्य प्राथमिक सहकारी समितियों से लेकर शीर्ष संस्थाओं तक चरणबद्ध तरीके से प्रोफेशनल मैनेजमेंट को लागू करना है। इससे नियुक्तियों में पारदर्शिता बढ़ेगी, कार्यकुशलता में सुधार होगा और नियुक्तियों से जुड़े भ्रष्टाचार पर भी प्रभावी अंकुश लगेगा। नियुक्तियों में भ्रष्टाचार समाप्त होने से सहकारी क्षेत्र में जनता का भरोसा बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि सहकारी बैंकों को अब आधुनिक बैंकिंग सेवाओं से जोड़ा गया है। डिजिटल भुगतान शुरू किया गया, साइबर सुरक्षा सुनिश्चित की गई, ई-केवाईसी शुरू की गई और डिजिटल लोन जैसी व्यवस्थाओं के साथ धीरे-धीरे हमारे अर्बन कोऑपरेटिव बैंक और डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक आगे बढ़ रहे हैं। डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंकों का कुल व्यवसाय पहले 19.6 लाख करोड़ रुपये था, जो आज 25 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। अकेले गुजरात में डेयरी, एपीएमसी, पैक्स और हर प्रकार की सहकारी समितियों के खाते सहकारी बैंकों में खोलने के कारण जिला सहकारी बैंकों की जमा राशि में बढ़ोतरी हुई है। इन प्रयासों से ढ़ेर सारे जिला सहकारी बैंक घाटे से मुनाफे में आ गए हैं। अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों का नेट प्रॉफिट लगभग दोगुना हो चुका है। पिछले पांच वर्षों में हम इन बैंकों का सकल एनपीए 12.8 प्रतिशत से घटाकर 6.2 प्रतिशत पर लाने और शुद्ध एनपीए को 5.1 प्रतिशत से घटाकर 0.7 प्रतिशत पर लाने में सफल रहे हैं। इससे जनता का भरोसा कोऑपरेटिव बैंकों पर बढ़ा है।
केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि हमने सहकारिता के बाजार लिंकेज को भी मजबूत किया है। निर्यात और जैविक उत्पादन के लिए तीन नई सहकारी समितियां बनाई गई हैं। डेयरी क्षेत्र में सर्कुलर इकोनॉमी को शत-प्रतिशत जमीन पर उतारने के लिए तीन और सहकारी समितियां बन चुकी हैं। हम नमक के क्षेत्र में भी प्रवेश कर चुके हैं। पहले किसान का उत्पाद गांव से मंडी तक पहुंचता था, अब सहकारिता के माध्यम से किसान का उत्पाद पूरी दुनिया तक पहुंच रहा है।
इस अवसर पर सहकारिता मंत्री ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं और पहलों का शिलान्यास, लोकार्पण और शुभारंभ किया। इनमें 135 अन्न भंडारण गोदामों का हस्तांतरण, 85 गोदामों का लोकार्पण और 47 गोदामों का शिलान्यास, अमूल और NCCF द्वारा सहकार वन का भूमि पूजन, उत्तर प्रदेश के बाराबंकी और महाराष्ट्र के जलगांव में BBSSL की टिश्यू कल्चर सुविधाओं का भूमि पूजन शामिल है। इनके अलावा एनसीडीसी 3.0 और जियो-टैग मोबाइल एप्लिकेशन का शुभारंभ, NDDB के दूध आपूर्ति समीक्षा डैशबोर्ड पोर्टल का शुभारंभ, कोऑपरेटिव इनपुट्स एंड सर्विसेज डिलीवरी मल्टी-स्टेट लिमिटेड के अंतर्गत डेयरी पशुओं की उत्पादकता से जुड़ी पहलों का शुभारंभ, कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स ऑर्गनाइजेशन मल्टी-स्टेट लिमिटेड का उद्घाटन, गोमय सहकारी समिति मल्टी-स्टेट लिमिटेड का उद्घाटन और NUCFDC की दो प्रमुख पहलों- सहकार CBS, केंद्रीकृत कोर बैंकिंग प्लेटफॉर्म तथा सहकार सहयोगी, शहरी सहकारी बैंकों के लिए संवादात्मक AI-संचालित प्लेटफॉर्म का अनावरण शामिल है।


