सहकारी बैंकों की स्वायत्तता बनाए रखने के साथ उनकी जवाबदेही और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। यह बात सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने राष्ट्रीय सहकारिता समीक्षा सम्मेलन के उद्घाटन में कही। उन्होंने राज्यों के सहकारिता पंजीयकों से अधिक सक्रिय और सतर्क भूमिका निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि सहकारी बैंकों के प्रशासन और सुशासन में किसी भी प्रकार की कमजोरी पूरे सहकारिता क्षेत्र की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है।
बस्तर में पहली बार आयोजित राष्ट्रीय सहकारिता समीक्षा सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. भूटानी ने कहा कि सहकारी बैंक ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के उन वर्गों तक वित्तीय सुविधाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिन्हें वाणिज्यिक बैंकों से पर्याप्त ऋण नहीं मिल पाता। इसलिए सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और भरोसेमंद बनाना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि सहकारिता मंत्रालय भारतीय रिजर्व बैंक के साथ निरंतर समन्वय कर रहा है, ताकि सहकारी बैंकों की वित्तीय क्षमता बढ़ाई जा सके और किसानों सहित अन्य हितधारकों को रियायती दरों पर ऋण उपलब्ध कराने की संभावनाएं मजबूत हों।
डॉ. भूटानी ने कहा कि लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे बस्तर में इस राष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन का सुझाव केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने स्वयं दिया था। यह आयोजन क्षेत्र में सहकारिता आधारित विकास को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।उद्घाटन सत्र में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकास शील ने कार्यशाला में भाग लेने वाले सभी राज्यों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए सहकारिता क्षेत्र के विकास के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर में आयोजित यह कार्यशाला राज्यों के बीच सहयोग, अनुभवों के आदान-प्रदान और व्यावहारिक समाधानों के विकास को नई गति प्रदान करेगी।
उल्लेखनीय है कि 8 और 9 अक्टूबर को आयोजित इस 9वें राष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी और सहकारिता पंजीयक भाग ले रहे हैं। सम्मेलन में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के डिजिटलीकरण, सहकारी बैंकिंग, डेयरी विकास, वित्तपोषण और आगामी तीन महीनों की कार्ययोजना पर मंथन किया जा रहा है।


