भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (IFFCO) ने चाय की खेती को अधिक उत्पादक और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। टी रिसर्च एसोसिएशन (TRA) की वार्षिक आम बैठक में इफको के नैनो तकनीक आधारित उर्वरक समाधान लॉन्च किए गए। इनका उद्देश्य चाय उत्पादकों को वैज्ञानिक पोषण प्रबंधन के माध्यम से बेहतर पैदावार प्राप्त करने में सहायता करना है।
इफको के प्रबंध निदेशक के.जे. पटेल के अनुसार, टी रिसर्च एसोसिएशन और इफको ने संयुक्त रूप से चार वर्षों तक नैनो उर्वरकों का परीक्षण किया। इन परीक्षणों में चाय की पैदावार में 8 से 14 प्रतिशत तक वृद्धि के उत्साहजनक परिणाम सामने आए।
इन परिणामों के आधार पर इफको नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को अब टी रिसर्च एसोसिएशन की चाय खेती संबंधी अनुशंसित कृषि पद्धतियों (Package of Practices) में शामिल किया जाएगा। इससे चाय उत्पादकों को अनुसंधान आधारित उर्वरक तकनीकों को अपनाने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम में केंद्रीय विदेश एवं वस्त्र राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा, भारतीय चाय बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं सीईओ सी. मुरुगन, इफको के विपणन निदेशक योगेंद्र कुमार, टीआरए के अध्यक्ष सुनील सिंह सिकंद, उपाध्यक्ष राजविंदर सिंह और सचिव जॉयदीप फुकन उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त, टोकलाई चाय अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. वेंकटेशन सेल्वराज और इफको के असम एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र के वरिष्ठ विपणन प्रबंधक सुनील कुमार ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
विशेषज्ञों के अनुसार, नैनो उर्वरकों को अनुशंसित कृषि पद्धतियों में शामिल करना चाय उद्योग के लिए महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल वैज्ञानिक अनुसंधान, उन्नत फसल पोषण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के साथ चाय उत्पादकों की उत्पादकता सुधारने में सहायक साबित हो सकती है।


