देश में डेयरी सहकारिता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। Cooperative Milk Producers’ Organization Multi-State Limited, जिसे National Dairy Development Board (NDDB), आनंद का संस्थागत समर्थन प्राप्त है, नौ राज्यों में करीब 20,000 Multipurpose Village Cooperative Societies (VCS) के नेटवर्क के जरिए मौजूदा दूध संग्रह केंद्रों को एकीकृत करने की तैयारी कर रहा है।
इस पहल के दायरे में आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। उद्देश्य छोटे दुग्ध उत्पादकों को संगठित सहकारी नेटवर्क से जोड़ना, उन्हें सीधे बाजार तक पहुंच देना और बेहतर भुगतान व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
गांव स्तर के दूध संग्रह ढांचे को सहकारी नेटवर्क से जोड़ने से किसानों की सामूहिक सौदेबाजी क्षमता बढ़ सकती है। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होने, संगठित खरीद व्यवस्था मजबूत होने और किसानों को दूध के मूल्य का बेहतर हिस्सा मिलने की संभावना है।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह भी डेयरी किसानों को सहकारी ढांचे से जोड़ने पर जोर देते रहे हैं। उनके अनुसार खुले बाजार में दूध बेचने वाले किसानों को कई बार करीब ₹35 प्रति लीटर मिलता है, जबकि सहकारी व्यवस्था से जुड़ने पर भुगतान ₹55 प्रति लीटर तक पहुंच सकता है। हालांकि वास्तविक भुगतान दूध की गुणवत्ता, फैट, SNF, स्थानीय बाजार और संबंधित सहकारी संस्था की भुगतान नीति पर निर्भर करता है।
करीब 20,000 गांव स्तरीय समितियों का प्रस्तावित नेटवर्क छोटे उत्पादकों के लिए संगठित बाजार तक पहुंच बढ़ा सकता है। इससे दूध संग्रह में पैमाना बढ़ने, लागत घटने और प्रोसेसिंग तथा मार्केटिंग नेटवर्क से बेहतर जुड़ाव की संभावना है। यह पहल सरकार के ‘सहकार से समृद्धि’ विजन के अनुरूप है। इसकी सफलता पारदर्शी भुगतान, पेशेवर प्रबंधन, कुशल संचालन और जमीनी स्तर पर किसानों तक वास्तविक लाभ पहुंचाने पर निर्भर करेगी।


