केंद्र की सभी योजनाओं में कोऑपरेटिव बैंकों की होगी भागीदारीः अमित शाह

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने गुजरात की राजधानी गांधीनगर में सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्रियों के साथ मंथन बैठक की। ‘मंथन बैठक’ का उद्देश्य 2047 में भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने में सहकारिता की भूमिका को और भी बढ़ाना है।

Published: 10:50am, 18 Feb 2026

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात की राजधानी गांधीनगर में ‘सहकार से समृद्धि’ के अंतर्गत सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्रियों के साथ मंथन बैठक की। अमित शाह ने ‘मंथन बैठक’ में इथेनॉल, एनर्जी, जैविक पोटाश, वेयरहाउस व प्रोटीन पाउडर प्लांट संबंधी 265 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। इस अवसर पर उन्होंने ‘सहकारिता में सहकार’ पर बल देते हुए कहा कि सभी सहकारी संस्थाओं के बैंक खाते जिला सहकारी बैंकों में होने चाहिए। साथ ही उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने निर्णय किया है कि भारत सरकार की सभी योजनाओं में कोऑपरेटिव बैंक को नोडल एजेंसी बनाया जा सकता है। राज्य सरकारों को प्रयास करना चाहिए कि प्रधानमंत्री किसान कल्याण योजना, वृद्धा पेंशन जैसी अन्य सभी योजनाओं का पैसा कोऑपरेटिव बैंकों के माध्यम से ही डाला जाए।

अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि इस मंथन बैठक का आयोजन इसीलिए हो रहा है कि हम 2047 में भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाना चाहते हैं। एक पूर्ण विकसित भारत का अर्थ है कि 140 करोड़ लोग सम्मान के साथ जी सकें, ऐसी व्यवस्था करना। भारत के हर परिवार, हर व्यक्ति को सम्मान के साथ जीने का माध्यम सिर्फ और सिर्फ सहकारिता ही बन सकती है।

अमित शाह ने कहा कि कृषि, ग्रामीण विकास और पशुपालन क्षेत्रों को जब तक हम मज़बूत नही करते हैं तब तक देश का सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता है। सभी को इस प्रयास को सफल बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। वैज्ञानिक तरीके से पिछले चार साल से देश के सहकारिता क्षेत्र को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है जिसके परिणाम अब दिखने लगे हैं।

केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह

अन्न भंडारण बढ़ाने में दोगुना योगदान दे सहकारिता क्षेत्र

अन्न भंडारण की व्यवस्था पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में इसे लगभग तीन गुना बढ़ाने की जरूरत है, जिसमें से दोगुना सहकारिता क्षेत्र को करनी चाहिए। ये सभी की जिम्मेवारी है। इसे केवल PACS पर न छोड़ें। तहसील की कोऑपरेटिव डेयरियां, स्टेट लेवल के मार्केटिंग फेडरेशन, डिस्टिक कोऑपरेटिव बैंक फाइनेंस कराकर, डिस्ट्रिक के सेल्स-परचेज यूनियन, सबको बड़े-बड़े गोदाम बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसका एक और पहलू है कि हमारा 70 प्रतिशत अनाज उत्तर भारत से – पंजाब और हरियाणा में खरीदा जाता है। यहीं से अनाज की खरीदी होगी, यहीं स्टोर होगा और यहीं से वितरित हो जाएगा तो हम ट्रांसपोर्टेशन की लगत कम से कम 30-40 प्रतिशत बचा सकतें हैं।

बंद चीनी मिलों को शुरू करने का प्रयास करें राज्य सरकारें

अमित शाह ने कहा कि सभी राज्य बंद पड़ी चीनी मिलों को शुरू करने के लिए प्रयास करें। अभी हमने राष्ट्रीय स्तर पर एक कोऑपरेटिव बनाई है। जिन शुगर मिलों की माली हालत ठीक नहीं है, वो अलग से उसमें खाद एवं गैस बनाने जैसी प्रक्रिया पूरी करें। आने वाले दिनों में शुगर मिल में अलग-अलग प्रकार के ग्यारह उत्पाद बन सके, इस प्रकार का सफल एक्सपेरिमेंट हो चुका है। उन्होंने कहा कि मैं मार्च के पहले हफ्ते में इस कार्यरचना को अंतिम रूप देने वाला हूं। जो शुगर मिल सिर्फ शुगर बना रही है वहां पर हमारी राष्ट्रीय स्तर की कोऑपरेटिव बाकी का सारा अटैचमेंट कर देगी। इसके लिए राज्यों को लचीली नीति बनानी पड़ेगी।

कारपेंटर्स, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन के लिए बनेगी कोऑपरेटिव सोसायटी

उन्होंने कहा कि हर राज्य अपने डेयरी विभाग और सहकारिता विभाग की टीमों को बनासकांठा डेयरी को देखने के लिए भेजें। बनासकांठा डेयरी ने कई प्रकार के काम किए हैं जिससे सभी राज्यों को काफी कुछ सीखने को मिलेगा। अमित शाह ने बताया कि आने वाले दिनों में मजदूरी करने वाले लोगों जैसे  कारपेंटर्स, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन के लिए भी कोऑपरेटिव बनाई जाएगी ताकि इन्हें सम्मानजनक मजदूरी मिल सके और उनका शोषण न हो। आने वाले दिनों में इस देश की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी सहकारिता के साथ जुड़ जाएगी। सहकारिता मंत्री ने कहा भारत टैक्सी आने वाले कुछ वर्षों में हर एक म्यूनिशिपल कॉरपोरेशन तक पहुंच जाएगी। 3 लाख से अधिक चालक इससे जुड़े चुके हैं। इससे चालकों और यात्रियों दोनों को लाभ मिलने वाला है।

इससे  पूर्व ‘मंथन बैठक’ में विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से सहकारिता से जुड़े हुए विभिन्न विषयों पर की गई पहलों की प्रगति, उपलब्धियों तथा भविष्य की कार्ययोजना का अवलोकन एवं मूल्यांकन किया गया। इन प्रस्तुतियों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने के लिए 2 लाख नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS), डेयरी एवं मत्स्य सहकारी समितियों की स्थापना की प्रगति पर चर्चा हुयी। इसके साथ-साथ ‘मंथन बैठक’ में विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना के अंतर्गत देशभर में आधुनिक गोदामों के नेटवर्क के विस्तार पर बल दिया गया, जिससे किसानों को बेहतर भंडारण, मूल्य स्थिरता और बाजार तक सुगम पहुंच सुनिश्चित हो सके।

गुजरात के गांधीनगर में आयोजित हुई सहकारिता मंथन बैठक

मंथन बैठक में राष्ट्रीय स्तर की नई सहकारी संस्थाओं नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड (NCEL), नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक लिमिटेड (NCOL) तथा भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL) में राज्यों की सक्रिय भागीदारी और  निर्यात, जैविक खेती और गुणवत्तापूर्ण बीज आपूर्ति के क्षेत्र में सहकारिता को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही राज्यों के सहकारिता कानूनों में समयानुकूल सुधार, 97वें संविधान संशोधन के अनुरूप मॉडल अधिनियम को अपनाने, सहकारी गन्ना मिलों की आर्थिक व्यवहार्यता तथा लाभ बढ़ाने, डेयरी क्षेत्र में सर्कुलरिटी एवं सस्टेनेबिलिटी को प्रोत्साहन देने तथा अमूल और एनडीडीबी के सहयोग से नई डेयरी सहकारी समितियों के गठन जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई।

बैठक में दलहन एवं मक्का उत्पादन को बढ़ावा देने, सहकारी बैंकों से जुड़ी चुनौतियों के समाधान, साझा सेवा इकाई (SSE) एवं अंब्रेला संरचना को सुदृढ़ करने, सदस्यता विस्तार एवं जागरूकता अभियान को मजबूत बनाने और प्रभावी मीडिया-संचार रणनीति विकसित करने जैसे विषयों पर भी विस्तार से प्रस्तुति एवं चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त, PACS एवं RCS कार्यालयों के कंप्यूटरीकरण, राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस के उपयोग, मानव संसाधन विकास, प्रशिक्षण और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर भी राज्यों से अपेक्षाओं को साझा किया गया।

YuvaSahakar Team

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