देश में मानसिक स्वास्थ्य की समस्या तेजी से गंभीर चुनौती बनती जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में हर 10 में से लगभग एक व्यक्ति किसी न किसी मानसिक विकार से प्रभावित है, जबकि तनाव, चिंता और मानसिक परेशानी का अनुभव करने वालों की संख्या इससे कहीं अधिक है। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को केवल गंभीर स्थिति में उपचार तक सीमित रखने के बजाय शुरुआती पहचान, जांच, परामर्श और जरूरत के अनुसार उपचार को स्वास्थ्य व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि देश की लगभग 10 से 12 प्रतिशत आबादी मानसिक विकारों से प्रभावित है। उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य एक व्यापक स्पेक्ट्रम है, जिसमें रोजमर्रा के तनाव से लेकर गंभीर और निदान योग्य मानसिक विकार तक शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव, चिंता और अवसाद जैसे विषयों पर समाज में खुलकर बातचीत बढ़ानी होगी। उनके अनुसार, यदि स्वास्थ्य व्यवस्था केवल उपचार पर निर्भर रहेगी तो समस्या के गंभीर होने के बाद ही प्रतिक्रिया दे पाएगी। इसलिए रोकथाम और शुरुआती हस्तक्षेप सबसे महत्वपूर्ण हैं।


