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सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी, भारत में चिप डिजाइन और निर्माण पर खर्च होंगे 1.27 लाख करोड़ रुपये

केंद्र सरकार ने भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1,27,500 करोड़ रुपये के बजट वाली इस योजना को स्वीकृति दी।

Published: 09:00am, 16 Jul 2026

केंद्र सरकार ने भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस योजना के लिए 1,27,500 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान को स्वीकृति दी गई। इसका उद्देश्य सेमीकॉन 1.0 से बनी गति को आगे बढ़ाते हुए देश में चिप डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग, अनुसंधान और प्रतिभा विकास का पूरा इकोसिस्टम तैयार करना है। अभी 315 विश्वविद्यालयों में आधुनिक EDA टूल्स के जरिए चिप डिजाइन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है और लगभग 68,000 छात्र प्रशिक्षित हो चुके हैं। भविष्य में क्लीन रूम, फैब निर्माण और सेमीकंडक्टर उत्पादन से जुड़ा व्यावहारिक प्रशिक्षण भी बढ़ाया जाएगा।

सेमीकॉन 2.0 को छह प्रमुख स्तंभों पर लागू किया जाएगा। पहला फोकस चिप डिजाइन पर होगा। अभी 105 स्टार्टअप चिप विकसित करने में जुटे हैं। नई योजना के तहत चिप, सिस्टम और बौद्धिक संपदा से जुड़े स्वदेशी डिजाइन को बढ़ावा दिया जाएगा।

दूसरे स्तंभ में सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए जरूरी मशीनों, सामग्री, रसायनों और गैसों का देश में उत्पादन करने वाली कंपनियों को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे सटीक विनिर्माण उद्योग को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

Semicon 2.0
Semiconductor Chip Design

तीसरे स्तंभ के तहत देश में अधिक सेमीकंडक्टर फैब स्थापित किए जाएंगे। भारत का पहला फैब वर्ष 2028 में शुरू होने की संभावना है। सरकार सिलिकॉन, कंपाउंड सेमीकंडक्टर, डिस्क्रीट कंपोनेंट और डिस्प्ले फैब स्थापित करने वाली वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करेगी।

चौथा फोकस ATMP और OSAT इकाइयों को मजबूत करने पर रहेगा। इसके तहत चिप की असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग से जुड़ी उन्नत तकनीकों को भारत लाने का प्रयास किया जाएगा।

अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में भारत अब 28 नैनोमीटर से 110 नैनोमीटर तकनीक से आगे बढ़कर अधिक उन्नत नोड्स पर काम करेगा। इसके लिए देश और विदेश के प्रमुख शोध संस्थानों के साथ सहयोग किया जाएगा

Jitendra