Trending News

पीएम नरेंद्र मोदी कल जींद से देश की पहली 'हाइड्रोजन ट्रेन' को दिखाएंगे हरी झंडी नीट यूजी की फीस रिफंड के लिए बैंक डिटेल जमा करने की तारीख बढ़ी, अब 31 जुलाई तक मौका इंग्लैंड को हराकर लगातार दूसरी बार फीफा विश्व कप फाइनल में पहुंचा अर्जेंटीना भारत नई दिल्ली में 5वीं BIMSTEC राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) की बैठक की मेजबानी करेगा हल्द्वानी में बनेगा उत्तराखंड का नया हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिए छह हफ्ते सीबीएसई की डिजिटल कॉपी जांच प्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा स्थायी समाधान पीएम नरेंद्र मोदी कल जींद से देश की पहली 'हाइड्रोजन ट्रेन' को दिखाएंगे हरी झंडी नीट यूजी की फीस रिफंड के लिए बैंक डिटेल जमा करने की तारीख बढ़ी, अब 31 जुलाई तक मौका इंग्लैंड को हराकर लगातार दूसरी बार फीफा विश्व कप फाइनल में पहुंचा अर्जेंटीना भारत नई दिल्ली में 5वीं BIMSTEC राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) की बैठक की मेजबानी करेगा हल्द्वानी में बनेगा उत्तराखंड का नया हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिए छह हफ्ते सीबीएसई की डिजिटल कॉपी जांच प्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा स्थायी समाधान

हाइड्रोजन से दौड़ेगी भारत की नई ट्रेन, पीएम कल दिखाएंगे हरी झंडी

भारतीय रेलवे स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन शुरू करने जा रहा है।

Indigenous Technology Future Rail Eco-Friendly Transport


Published: 13:15pm, 16 Jul 2026

भारत में रेल यात्रा अब एक नए युग में प्रवेश करने जा रही है। भाप इंजन से डीजल और फिर विद्युत रेल तक का सफर तय करने के बाद भारतीय रेलवे अब देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन शुरू कर इतिहास रच दिया है। अब धुएं से नहीं, हाइड्रोजन से जींद–सोनीपत रेलखंड पर पहली ट्रेन दौड़ेगी । यह ट्रेन न केवल पर्यावरण के अनुकूल होगी, बल्कि भारत को हरित परिवहन के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों की श्रेणी में भी खड़ा करेगी। यह परियोजना राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन और वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को जींद में हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।

हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह अपने लिए आवश्यक बिजली स्वयं तैयार करती है। पारंपरिक ट्रेनों की तरह इसे ओवरहेड बिजली लाइन या डीजल इंजन की जरूरत नहीं होती। ट्रेन में लगे प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन फ्यूल सेल में संग्रहित हाइड्रोजन वातावरण की ऑक्सीजन से रासायनिक प्रतिक्रिया करती है, जिससे बिजली उत्पन्न होती है। यही बिजली ट्रेन के मोटरों को चलाती है। इस प्रक्रिया में धुआं, कार्बन डाइऑक्साइड या अन्य प्रदूषक गैसें नहीं निकलतीं, बल्कि केवल जलवाष्प और थोड़ी गर्मी उत्पन्न होती है।भारतीय रेलवे की यह हाइड्रोजन ट्रेन दुनिया की अन्य हाइड्रोजन ट्रेनों से कई मायनों में अलग है। जहां जर्मनी, फ्रांस और जापान जैसे देशों में दो से चार डिब्बों वाली हाइड्रोजन ट्रेनें चल रही हैं, वहीं भारत ने सीधे 10 कोच वाली ट्रेन विकसित की है, जिसमें लगभग 2,600 यात्री सफर कर सकेंगे। यह ट्रेन शुरुआती चरण में हरियाणा के जींद–सोनीपत रेलखंड पर चलेगी। इसकी परिचालन गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा और डिजाइन गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है।

हाइड्रोजन अत्यधिक ज्वलनशील गैस मानी जाती है, इसलिए सुरक्षा को लेकर लोगों के मन में स्वाभाविक सवाल उठते हैं। भारतीय रेलवे ने इस चुनौती का समाधान अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणालियों के माध्यम से किया है। ट्रेन में हाइड्रोजन लीक, अत्यधिक तापमान, आग और धुएं का पता लगाने वाले सेंसर, स्वचालित गैस कट-ऑफ सिस्टम, निरंतर वेंटिलेशन, अग्निशमन व्यवस्था तथा रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए गए हैं। पूरी प्रणाली का स्वतंत्र सुरक्षा परीक्षण जर्मनी की प्रतिष्ठित संस्था TÜV SÜD द्वारा किया गया है, जबकि इसे PESO और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रमाणित किया गया है।

इस परियोजना का एक और महत्वपूर्ण पहलू हरियाणा के जींद में स्थापित देश का पहला एकीकृत रेलवे हाइड्रोजन ईंधन स्टेशन है। यहां पानी के इलेक्ट्रोलिसिस से हाइड्रोजन तैयार की जाती है, उसे उच्च दाब पर संग्रहित किया जाता है और फिर विशेष डिस्पेंसर के माध्यम से ट्रेन में भरा जाता है। यह भारत में पूर्ण हाइड्रोजन रेलवे इकोसिस्टम की शुरुआत है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो भविष्य में हाइड्रोजन तकनीक का विस्तार देश के अन्य रेलमार्गों और यहां तक कि कालका-शिमला जैसी विरासत रेल लाइनों तक किया जा सकता है। इससे डीजल पर निर्भरता घटेगी, कार्बन उत्सर्जन कम होगा और भारत स्वच्छ, टिकाऊ तथा आत्मनिर्भर रेल परिवहन की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाएगा। भारतीय रेलवे की यह पहल केवल एक नई ट्रेन नहीं, बल्कि भविष्य की हरित और सुरक्षित यात्रा का प्रतीक है।

Jitendra