ग्रामीण बैंकों की ऋण रफ्तार तेज, RRBs का बकाया कर्ज 5.78 लाख करोड़ रुपये पहुंचा

वित्त वर्ष 2025–26 में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और वित्तीय समावेशन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।

RRBs Strengthen Rural Credit Delivery, Priority Sector Lending Reaches 91.7% of ANBC


Published: 09:00am, 19 Aug 2026

वित्त वर्ष 2025–26 में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और वित्तीय समावेशन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। वर्ष के दौरान RRBs का कुल बकाया ऋण 10.3 प्रतिशत बढ़कर 5.78 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो 2024–25 में 5.24 लाख करोड़ रुपये था।

प्राथमिकता क्षेत्र ऋण में भी RRBs का प्रदर्शन मजबूत रहा। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित 75 प्रतिशत के लक्ष्य के मुकाबले RRBs ने औसतन 91.7 प्रतिशत Adjusted Net Bank Credit (ANBC) तक ऋण पहुंचाया। लगभग सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने प्राथमिकता क्षेत्र ऋण का लक्ष्य हासिल किया।

RRBs के ऋण पोर्टफोलियो में कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी रही। कृषि क्षेत्र में बकाया ऋण 3.78 लाख करोड़ रुपये रहा, जो कुल प्राथमिकता क्षेत्र ऋण का लगभग 77 प्रतिशत है। इसमें कृषि ऋण का बड़ा हिस्सा फसल उत्पादन और अन्य कृषि गतिविधियों के लिए दिया गया।

ग्रामीण रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने में भी RRBs की भूमिका महत्वपूर्ण रही। MSME क्षेत्र को 66,978 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया। इसमें 95 प्रतिशत से अधिक ऋण सूक्ष्म उद्यमों को मिला, जिससे छोटे कारोबारी, कारीगर, स्वरोजगार से जुड़े लोग और पहली बार व्यवसाय शुरू करने वाले उद्यमी लाभान्वित हुए।

कमजोर वर्गों तक संस्थागत ऋण पहुंचाने में भी RRBs ने उल्लेखनीय योगदान दिया। इस वर्ग को 3.49 लाख करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया। इसके अलावा आवास, शिक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और सामाजिक बुनियादी ढांचे के लिए भी वित्तीय सहायता दी गई।

कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2025–26 में RRBs ने किसानों, छोटे उद्यमियों और कमजोर वर्गों तक ऋण पहुंचाकर ग्रामीण आजीविका, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को मजबूती दी है। यह प्रदर्शन ग्रामीण विकास और समावेशी आर्थिक वृद्धि में RRBs की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

Jitendra