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RBI की स्थायी सलाहकार समिति की बैठक: शहरी सहकारी बैंकों की ने शाखा लाइसेंसिंग को दंड से अलग करने की मांग

RBI की बैठक में शाखा लाइसेंसिंग, दंड प्रणाली, और विनियामक सुधारों जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई, ताकि शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत किया जा सके और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया जा सके।

Published: 13:21pm, 04 Jul 2025

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंकों (यूसीबी) के लिए स्थायी सलाहकार समिति (SAC) की 39वीं बैठक का आयोजन किया। इस बैठक की अध्यक्षता आरबीआई के डिप्टी गवर्नर एम. राजेश्वर राव ने की। बैठक में देश भर के सहकारी बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ प्रतिनिधियों व हितधारकों ने भाग लिया।

इस उच्चस्तरीय बैठक का उद्देश्य यूसीबी को प्रभावित करने वाले प्रमुख नीतिगत एवं व्यवस्थागत मुद्दों पर विचार-विमर्श करना और सुधारात्मक सुझावों को आगे बढ़ाना रहा। बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों ने शाखा लाइसेंसिंग प्रक्रिया को आरबीआई द्वारा लगाए गए दंड से पृथक करने, बैंकिंग विनियमन अधिनियम और राज्य सहकारी अधिनियमों के बीच अंतर्विरोध को दूर करने, तथा दंड मामलों में अपीलीय प्राधिकरण की स्थापना जैसे अनेक विषयों को प्रमुखता से उठाया।

बैठक में सहकारी बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े प्रमुख अधिकारी जैसे कि सीआरसीएस रवीन्द्र अग्रवाल, एनयूसीएफडीसी के अध्यक्ष ज्योतिंद्र मेहता, नेफकॉब के उपाध्यक्ष मिलिंद काले, राजस्थान व महाराष्ट्र के यूसीबी फेडरेशन के अध्यक्षगण, और प्रमुख सहकारी बैंकों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

एनयूसीएफडीसी के अध्यक्ष ज्योतिंद्र मेहता ने इस बैठक को “वास्तविक मुद्दों को सामने रखने का एक प्रभावी मंच” बताया और यूसीबी को लेकर आरबीआई के दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने कहा कि यूसीबी वित्तीय समावेशन के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें सक्षम नियामकीय ढांचे की आवश्यकता है। उन्होंने आरबीआई से आग्रह किया कि वह इंटर-बैंक उधारी मानदंडों में ढील देने, यूसीबी को सरकारी कार्यों में भागीदारी देने, डीआईसीजीसी प्रीमियम दरों को कम करने, और ASBA तथा NRO खाता सुविधाएं प्रदान करने जैसे लंबित सुधारों को शीघ्र लागू करे।

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि हाल ही में रियल एस्टेट लोन (REL) सीमा में 10% से घटाकर 5% करने के फैसले ने कई यूसीबी को प्रभावित किया है। हितधारकों ने मांग की कि इस कटौती को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए ताकि बैंकों को अनुकूलन का समय मिल सके। इसके अतिरिक्त, दंड और शाखा विस्तार के बीच संबंध को खत्म करने और दंड प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाने की भी मांग की गई।

प्रवेश मानदंडों पर चर्चा करते हुए, नेफकॉब ने आरबीआई से आग्रह किया कि पात्र क्रेडिट सोसायटियों को यूसीबी लाइसेंस प्रदान किया जाए तथा राज्य सहकारी अधिनियमों के साथ तालमेल बनाया जाए। साथ ही अनुसूचित यूसीबी को सरकारी कार्य संचालन की अनुमति देने, अपीलीय प्राधिकरण की स्थापना करने, और अंतर-बैंक जोखिम सीमाओं में ढील देने जैसे अहम सुझाव भी प्रस्तुत किए गए।

बैठक आईटी और साइबर सुरक्षा को लेकर भी सुझाव दिए गए कि यूसीबी के निदेशक मंडलों में तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल किया जाए। इसके अलावा, पीसीए (Prompt Corrective Action) मानदंडों में स्पष्टता लाने, शेयर पूंजी दिशा-निर्देशों में एकरूपता और FSWM बैंकों को ASBA सेवाएं व NRO खाता खोलने की अनुमति दिए जाने की भी मांग की गई।

सभी उपस्थित प्रतिनिधियों ने RBI द्वारा ऐसी संवादात्मक बैठकों को नियमित रूप से आयोजित करने पर सहमति जताई और उम्मीद जताई कि शहरी सहकारी बैंकों की मजबूती और प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए जल्द ठोस निर्णय लिए जाएंगे।

YuvaSahakar Desk