देश के कई हिस्सों में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से बारिश का संकट गहराता जा रहा है। 15 जुलाई तक देश में सामान्य से 23 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून ट्रफ लाइन के हिमालय की ओर खिसकने से उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत के मैदानी इलाकों में बारिश की गतिविधियां कमजोर हो गई हैं, जबकि पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में अच्छी बारिश जारी है।
पूर्वोत्तर को छोड़ अधिकांश क्षेत्रों में बारिश की कमी
पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में 15 जुलाई तक 348 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो सामान्य 540 मिलीमीटर के मुकाबले 36 प्रतिशत कम है। उत्तर-पश्चिम भारत में 137 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 19 प्रतिशत कम है। मध्य भारत में 273 मिलीमीटर बारिश हुई, जो औसत से 13 प्रतिशत कम है, जबकि दक्षिण भारत में 190 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से 26 प्रतिशत कम है। पूरे देश में अब तक 227 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि इस अवधि तक सामान्य रूप से 294.2 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी।
मानसून ट्रफ लाइन खिसकने से बिगड़ा मौसम
मौसम विभाग का कहना है कि बारिश में कमी की सबसे बड़ी वजह मानसून ट्रफ लाइन का हिमालय की तलहटी की ओर खिसकना है। इसके कारण बारिश लाने वाली नम हवाएं मैदानी इलाकों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। इसी वजह से दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां कमजोर बनी हुई हैं। दूसरी ओर असम, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में पिछले 24 घंटों के दौरान अच्छी बारिश दर्ज की गई है।
खरीफ बुआई पर बढ़ा असर
बारिश की कमी का असर कृषि क्षेत्र पर भी दिखने लगा है। कई राज्यों में खरीफ फसलों की बुआई की रफ्तार धीमी हुई है और किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। यदि आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय नहीं हुआ, तो धान, दलहन, तिलहन और अन्य खरीफ फसलों की बुआई और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि मौसम विभाग को उम्मीद है कि मानसून ट्रफ लाइन के सामान्य स्थिति में लौटने पर देश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां फिर तेज हो सकती हैं, जिससे किसानों को राहत मिलने की संभावना है।


