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ग्रामीण भारत के लिए NABARD की डिजिटल क्रांति, GRIP, CoLab और ‘निवारण’ प्रणाली का शुभारंभ

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने अपने 44वें स्थापना दिवस के अवसर पर ग्रामीण विकास और वित्तीय समावेशन को मजबूती देने के उद्देश्य से कई नई योजनाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म की शुरुआत की। चेन्नई में आयोजित कार्यक्रम में GRIP पोर्टल, CoLab इनोवेशन प्लेटफॉर्म, निवारण शिकायत प्रणाली और नाबार्ड के व्हाट्सएप चैनल का शुभारंभ किया गया।

Published: 09:00am, 19 Jul 2025

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने अपनी स्थापना के 44 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया। इस मौके पर नाबार्ड अध्यक्ष शाजी के. वी., वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू और तमिलनाडु के मुख्य सचिव एन. मुरुगनंदम उपस्थित रहे।

इस अवसर पर नाबार्ड ने तीन प्रमुख डिजिटल पहलों की शुरुआत की — GRIP पोर्टल, CoLab प्लेटफॉर्म, और ‘निवारण’ शिकायत समाधान प्रणाली, जिनका उद्देश्य है ग्रामीण भारत में नवाचार, आजीविका और सेवा वितरण को सशक्त बनाना।

GRIP पोर्टल: ग्रामीण आयवृद्धि की दिशा में ठोस कदम

GRIP (Graduated Rural Income Generation Programme) पोर्टल का उद्देश्य अति-गरीब ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इसके तहत लाभार्थियों को वापसी योग्य सब्सिडी, कौशल प्रशिक्षण और आजीविका गतिविधियों से जोड़ने की सुविधा दी जाएगी।

इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लाभार्थी आवेदन कर सकेंगे, प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे और योजनाओं की प्रगति भी ट्रैक कर सकेंगे। यह पहल रोजगार सृजन, वित्तीय समावेशन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने में सहायक होगी।

CoLab पोर्टल: डिजिटल नवाचार के लिए साझा मंच

नाबार्ड द्वारा लॉन्च किया गया CoLab पोर्टल एक ओपन डिजिटल इनोवेशन प्लेटफॉर्म है, जो फिनटेक, एग्रीटेक और अन्य डिजिटल समाधान प्रदाताओं को SHG, FPO, NGO और सहकारी बैंकों से जोड़ता है। इसका उद्देश्य है ग्रामीण क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी आधारित नवाचारों को बढ़ावा देना और उन्हें वित्तीय तथा तकनीकी सहायता प्रदान करना।

‘निवारण’ प्रणाली और व्हाट्सएप चैनल

नाबार्ड ने ‘निवारण’ नामक 24×7 शिकायत समाधान प्रणाली की भी शुरुआत की है, जो विशेष रूप से ग्रामीण सहकारी बैंकों की शिकायतों के त्वरित और पारदर्शी समाधान के लिए डिज़ाइन की गई है। इसके साथ ही नाबार्ड के आधिकारिक व्हाट्सएप चैनल की शुरुआत भी की गई, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों तक योजनाओं की सीधी जानकारी पहुँच सकेगी।

ये सभी पहलें ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने, वित्तीय सेवाओं की पारदर्शिता बढ़ाने और डिजिटल समावेशन को सशक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही हैं।

YuvaSahakar Desk

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