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KCC ऋण के लिए किसानों को नहीं लगाने पड़ेंगे बैंक के चक्कर, नाबार्ड के eKCC पोर्टल से घर बैठे कर सकेंगे आवेदन

नाबार्ड ने ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को त्वरित और पारदर्शी कृषि ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ईकिसानक्रेडिट (ई-केसीसी) पोर्टल लॉन्च किया है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म की सहायता से केसीसी धारक अब बिना बैंक गए ऋण के लिए आवेदन कर सकते हैं।

Published: 17:14pm, 19 May 2025

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने ग्रामीण बैंकिंग संस्थानों के लिए 24X7 मनीवर्क्स कंसल्टिंग के सहयोग से ईकिसानक्रेडिट (ईकेसीसी) पोर्टल विकसित किया है। इस डिजिटल पोर्टल का उद्देश्य किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) धारकों को कृषि ऋण का त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध वितरण सुनिश्चित करना है। यह पहल ग्रामीण भारत में छोटे और सीमांत किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

नाबार्ड के उप प्रबंध निदेशक श्री अजय सूद ने बताया कि ईकेसीसी पोर्टल ग्रामीण सहकारी बैंकों (आरसीबी) और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह किसानों को बैंक शाखाओं में बार-बार चक्कर लगाए बिना डिजिटल माध्यम से ऋण आवेदन जमा करने की सुविधा प्रदान करता है। पोर्टल रिजर्व बैंक के एकीकृत ऋण इंटरफेस के माध्यम से डिजिटल भूमि रिकॉर्ड तक पहुंचता है और आधार प्रमाणीकरण, ई-केवाईसी, ई-साइन, और आधार डेटा वॉल्ट के लिए सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कम्प्यूटिंग (सी-डैक) की तकनीकी सहायता का उपयोग करता है।

वर्तमान में, छह राज्यों में इस पोर्टल के माध्यम से ऋण स्वीकृति की पायलट परियोजना चल रही है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस परियोजना ने ऋण स्वीकृति में लगने वाले समय और लागत को उल्लेखनीय रूप से कम किया है। श्री सूद ने बताया कि इस पायलट परियोजना को शीघ्र ही देशभर में विस्तारित किया जाएगा। साथ ही, सभी आरसीबी और आरआरबी को इस पोर्टल से जोड़ने और केसीसी जारी करने की प्रक्रिया भी प्रगति पर है।

पारंपरिक ऋण आवेदन प्रक्रिया में कई अक्षमताएं, जैसे बार-बार बैंक जाना, 3-4 सप्ताह का लंबा प्रसंस्करण समय, और कागज-आधारित प्रणाली, किसानों के लिए चुनौती बनी हुई थीं। ईकेसीसी पोर्टल इन समस्याओं का समाधान प्रदान करता है। नाबार्ड के अध्यक्ष श्री शाजी के.वी. ने हाल ही में कहा कि डिजिटल किसान क्रेडिट कार्ड ने कृषि ऋण वितरण में पहुंच, पारदर्शिता, और दक्षता में सुधार की अपार संभावनाएं प्रदर्शित की हैं। यह सहकारी बैंकों, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स), और आरआरबी को छोटे और सीमांत किसानों को समावेशी और त्वरित ऋण सेवाएं प्रदान करने में सक्षम बनाएगा।

एक आधिकारिक नोट के अनुसार, वाणिज्यिक बैंक डिजिटल तकनीकों को अपनाने में अग्रणी हैं, जबकि ग्रामीण बैंक उच्च लागत और सीमित तकनीकी क्षमता के कारण पिछड़ रहे हैं। नाबार्ड का यह पोर्टल ग्रामीण बैंकों की तकनीकी क्षमता को बढ़ाने और किसानों को डिजिटल बैंकिंग की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

इस पहल से न केवल कृषि ऋण वितरण प्रणाली में सुधार होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

YuvaSahakar Desk