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कामधेनु योजना से पशुपालकों का आर्थिक सशक्तिकरण, डेयरी फार्मिंग के लिए 42 लाख तक लोन और सब्सिडी

मध्यप्रदेश सरकार की डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत डेयरी फार्मिंग के लिए 36-42 लाख रुपये तक का लोन और 25-33% सब्सिडी प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम (IFS) को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने और पशुपालन को लाभकारी बनाने पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें बकरी और मुर्गी पालन के माध्यम से ऑर्गेनिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।

Published: 11:14am, 08 Aug 2025

मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) सरकार (CM Mohan Yadav) किसानों (Farmers) और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए तमाम प्रयास कर रही है। इसी क्रम में राज्य सरकार (Madhya Pradesh Government) द्वारा पशुपालन को लाभकारी व्यवसाय में परिवर्तित करने हेतु डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना (Bhimrao Ambedkar Kamdhenu Yojana) संचालित की जा रही है। इस योजना का उद्देश्य डेयरी उद्योग (dairy Sector) को संगठित रूप देना और पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

योजना का संचालन पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग द्वारा किया जा रहा है। इसके अंतर्गत पात्र किसानों को ₹36 लाख से ₹42 लाख तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही परियोजना लागत पर 25% से 33% तक अनुदान (सब्सिडी) की भी सुविधा प्रदान की जाती है। योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक के पास कम से कम 3.5 एकड़ भूमि का स्वामित्व अनिवार्य है। आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन अथवा संबंधित विभागीय कार्यालय के माध्यम से की जा सकती है।

जिले के उपसंचालक डॉ. एन. के. शुक्ला के अनुसार, वर्ष 2025 में इस योजना के तहत जिले में 22 किसानों को लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे डेयरी उद्योग को संस्थागत आधार मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

साथ ही सरकार इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम (IFS) को भी बढ़ावा दे रही है, जिसके अंतर्गत बकरी पालन और मुर्गी पालन को एकीकृत ढंग से संचालित किया जाता है। इस प्रणाली से अंडा, देसी चिकन, दूध और मीट जैसे बहु-आय के स्रोत तैयार किए जा सकते हैं। CIRG, मथुरा के वैज्ञानिकों के अनुसार, बकरियों का बचा चारा मुर्गियां खा जाती हैं, जिससे खुराक की लागत में कमी आती है।

IFS के तहत बकरी की मेंगनी से उगाया गया चारा पूरी तरह जैविक होता है, जिससे बकरी का दूध व मीट भी ऑर्गेनिक बनता है। इस प्रणाली में एक विशेष शेड तैयार किया जाता है, जिसमें लोहे की जाली से अलग-अलग खंड बनाए जाते हैं। सुबह के समय जब बकरियों को बाहर चरने भेजा जाता है, तब मुर्गियां उसी स्थान का उपयोग करती हैं, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होता है।

YuvaSahakar Desk