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‘मुख्यमंत्री वृन्दावन ग्राम योजना’ को कैबिनेट की मंजूरी, डेयरी-पशुपालन क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य

मध्य प्रदेश सरकार ने 'मुख्यमंत्री वृन्दावन ग्राम योजना' को कैबिनेट से मंजूरी दी है, जिसके तहत हर विधानसभा क्षेत्र से एक गांव को आत्मनिर्भर बनाकर विकास का आदर्श मॉडल प्रस्तुत किया जाएगा। योजना में डेयरी, पशुपालन, जैविक खेती, जल संरक्षण और ग्रामीण रोजगार जैसे क्षेत्रों में व्यापक विकास किया जाएगा।

Published: 09:00am, 07 Jul 2025

मध्य प्रदेश सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में ‘मुख्यमंत्री वृन्दावन ग्राम योजना’ को मंजूरी दी गई। इस योजना के तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से न्यूनतम 2000 की आबादी और 500 गोवंश वाले एक गांव का चयन कर उसे आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाया जाएगा। यह योजना गौपालन, डेयरी विकास, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, सौर ऊर्जा, और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में समावेशी और टिकाऊ विकास सुनिश्चित हो।

‘मुख्यमंत्री वृन्दावन ग्राम योजना’ का मुख्य उद्देश्य चयनित गांवों में गौपालन और डेयरी विकास को बढ़ावा देना, ग्रामीण आजीविका को सशक्त करना, और पर्यावरण संरक्षण के साथ आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करना है। यह योजना ग्रामीण विकास के लिए एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत करेगी, जो अन्य गांवों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। योजना के तहत छह प्रमुख श्रेणियों में सुविधाएँ प्रदान की जाएंगी, जिनमें बुनियादी ढांचा, जल संरक्षण, आजीविका गतिविधियाँ, पंचायत सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण, और ग्रामीण पर्यटन शामिल हैं।

योजना के तहत चयनित गांवों में बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसमें गौशाला, ग्राम पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, आंगनबाड़ी भवन, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल भवन, यात्री प्रतीक्षालय, सोलर स्ट्रीट लाइट, पुस्तकालय, आजीविका भवन, पशु चिकित्सालय, ग्रामीण सड़कें, नालियाँ, सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानें, और गोदाम शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, हर घर जल योजना के तहत सोलर ऊर्जा आधारित पंप, बायोगैस प्लांट, शांतिधाम (श्मशान घाट), गौ-समाधि स्थल, कृत्रिम गर्भाधान केंद्र, जल निकासी व्यवस्था, जलवायु अनुकूल आवास, व्यक्तिगत शौचालय, पार्क, सार्वजनिक शौचालय, और ड्रिप सिंचाई जैसी सुविधाएँ प्रदान की जाएंगी।

योजना के अंतर्गत आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिसमें नंदन फलोद्यान, पोषण वाटिका, दूध कलेक्शन सेंटर, लघु वनोपज आधारित उद्योग, और कृषि/फल उपज आधारित उद्योग शामिल हैं। जल संरक्षण के लिए जल संचयन संरचनाएँ, रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग, नलकूप रिचार्ज, डगवेल रिचार्ज, स्टॉप डैम/चेक डैम, और तालाबों का संरक्षण किया जाएगा। इसके साथ ही, पंचायत सशक्तिकरण के लिए स्वयं की आय स्रोत और ई-पंचायत या CSC सुविधाएँ विकसित की जाएंगी।

योजना के तहत गांवों को अतिक्रमण मुक्त बनाया जाएगा, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा, और धार्मिक स्थलों को संरक्षित किया जाएगा। ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए होम-स्टे और हस्तशिल्प कला केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण स्कूलों और आंगनबाड़ियों में बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन, कचरा प्रबंधन, ग्रे वाटर मैनेजमेंट, मल-कीचड़ प्रबंधन, और राजस्व अभिलेखों को अपडेट करने की व्यवस्था की जाएगी।

YuvaSahakar Desk