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हिमाचल सरकार की दूध पर MSP योजना से पशुपालकों की आय में वृद्धि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल

हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू किए जाने का सकारात्मक असर दिखने लगा है। पहले ही दिन 38 हजार से अधिक पशुपालकों को इसका लाभ मिला है।

Published: 09:00am, 20 Jun 2025

हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा कुछ सप्ताह पूर्व घोषित की गई दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) नीति का प्रभाव अब ज़मीन पर दिखने लगा है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में शुरू की गई इस पहल के पहले ही दिन प्रदेश के लगभग 38,400 पशुपालकों को इसका सीधा लाभ मिला है।

सरकार द्वारा अब हर दिन लगभग 2.25 लाख लीटर गाय का दूध 51 रुपये प्रति लीटर के MSP पर खरीदा जा रहा है। इसके अतिरिक्त 1,482 पशुपालकों से करीब 7,800 लीटर भैंस का दूध 61 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जा रहा है।

गुणवत्ता आधारित खरीद को प्राथमिकता

भैंस के दूध की खरीद गुणवत्ता के आधार पर की जा रही है ताकि पशुपालक शुद्ध और उच्च गुणवत्ता वाला दूध उपलब्ध कराएं। इससे न केवल पशुओं की देखभाल बेहतर होगी बल्कि आमदनी में भी इज़ाफा होगा।

मोबाइल वेटरनरी यूनिट से गांव-गांव इलाज

प्रदेश भर में पशुओं के इलाज के लिए मोबाइल वेटरनरी यूनिट भी सक्रिय कर दी गई हैं। ये यूनिट दूर-दराज के गांवों में जाकर समय पर पशु चिकित्सा सेवा उपलब्ध करा रही हैं, जिससे पशुपालकों को अब इलाज के लिए शहरों की ओर नहीं भागना पड़ता।

गांवों की अर्थव्यवस्था को नई ताकत

राज्य सरकार का मानना है कि इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। छोटे पशुपालकों को अब स्थिर और भरोसेमंद आय का जरिया मिला है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रहे हैं। मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि सरकार का अगला लक्ष्य अधिक से अधिक पशुपालकों को इस योजना से जोड़ना है ताकि गांवों की अर्थव्यवस्था और सशक्त हो सके।

YuvaSahakar Desk