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विदेश में मेडिकल डिग्री, लेकिन भारत में लाइसेंस की कठिन परीक्षा

विदेशों में मेडिकल सीटें अपेक्षाकृत आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं और कई देशों में प्रवेश के लिए अलग से कठिन प्रवेश परीक्षा भी नहीं देनी पड़ती

Published: 11:50am, 26 Jun 2026

विदेश में मेडिकल शिक्षा का सपना देखने वाले हजारों भारतीय छात्रों के लिए केवल एमबीबीएस की डिग्री हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है। भारत लौटकर डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करने के लिए उन्हें फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) पास करना अनिवार्य होता है, और यही परीक्षा सबसे बड़ी चुनौती बन रही है। हर वर्ष इस परीक्षा में केवल लगभग 22 से 29 प्रतिशत अभ्यर्थी ही सफल हो पाते हैं।

कम खर्च और आसान प्रवेश प्रक्रिया के कारण रूस, जॉर्जिया, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, फिलीपींस और नेपाल जैसे देशों में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए जाते हैं। विदेशों में मेडिकल सीटें अपेक्षाकृत आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं और कई देशों में प्रवेश के लिए अलग से कठिन प्रवेश परीक्षा भी नहीं देनी पड़ती। यही वजह है कि हर साल हजारों भारतीय छात्र विदेश का रुख करते हैं।

हालांकि, भारत में चिकित्सा अभ्यास का लाइसेंस प्राप्त करने के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के नियमों के अनुसार FMGE पास करना अनिवार्य है। हाल के वर्षों के परिणाम बताते हैं कि परीक्षा का स्तर काफी कठिन है। दिसंबर 2025 सत्र में 43,933 अभ्यर्थियों में से केवल 10,264 सफल हुए और सफलता दर 23.37 प्रतिशत रही। जून 2025 में यह 28.61 प्रतिशत तथा दिसंबर 2024 में 28.90 प्रतिशत रही।

विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश में पढ़ाई के दौरान ही भारतीय मेडिकल पाठ्यक्रम और FMGE के पैटर्न के अनुसार नियमित तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। अंतिम वर्ष या इंटर्नशिप का इंतजार करने के बजाय शुरुआत से ही कॉन्सेप्ट आधारित अध्ययन, नियमित मॉक टेस्ट और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का अभ्यास सफलता की संभावना को काफी बढ़ा सकता है। विदेश से डिग्री प्राप्त करने के बाद भारत में डॉक्टर बनने का वास्तविक रास्ता FMGE से होकर ही गुजरता है, इसलिए इसकी तैयारी को मेडिकल शिक्षा का अभिन्न हिस्सा मानना चाहिए।

YuvaSahakar Desk