चीनी उत्पादन में गिरावट के बीच NFCSF का आश्वासन- घरेलू मांग के लिए पर्याप्त भंडार उपलब्ध

चीनी उत्पादन में गिरावट के बावजूद, NFCSF ने आश्वस्त किया है कि देश के पास अक्टूबर-नवंबर 2025 तक की मांग के लिए पर्याप्त भंडार है। संगठन ने चीनी मूल्य बढ़ाने और इथेनॉल नीति में सुधार की मांग करते हुए भविष्य में उत्पादन सुधार की संभावना भी जताई है।

Published: 09:00am, 17 May 2025

भारत, जो दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक और उपभोक्ता देशों में शामिल है, इस समय चीनी उत्पादन में गिरावट का सामना कर रहा है। इसके बावजूद, नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) ने देशवासियों को आश्वस्त किया है कि मौजूदा भंडार 2025 के अंत तक घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम है।

NFCSF के अनुसार, 2024-25 चीनी वर्ष के अंत तक देश में लगभग 4.8 से 5 मिलियन टन चीनी का स्टॉक उपलब्ध रहेगा, जो अक्टूबर-नवंबर 2025 की मांग के लिए पर्याप्त है। इससे न केवल घरेलू बाजार में स्थिरता बनी रहेगी, बल्कि गन्ना किसानों और चीनी मिलों से जुड़े व्यापारियों को भी संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

NFCSF द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अक्टूबर से 15 मई तक गन्ने की कुल पेराई 276.77 मिलियन टन रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 312.26 मिलियन टन थी। इसके चलते 2024-25 में चीनी उत्पादन घटकर 26.11 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो 2023-24 में 31.9 मिलियन टन था।

संगठन ने आगामी वर्ष के लिए आशा जताई है कि अनुकूल मानसून और महाराष्ट्र व कर्नाटक जैसे प्रमुख राज्यों में गन्ने की बुवाई में हुई वृद्धि के कारण 2025-26 में उत्पादन में फिर से वृद्धि हो सकती है।

फिलहाल देश में मिलगेट चीनी कीमतें ₹3,880 से ₹3,920 प्रति क्विंटल के बीच स्थिर बनी हुई हैं। यह स्थिरता कम उत्पादन और सरकार की सीमित निर्यात नीति के कारण बनी हुई है।

NFCSF ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह बढ़ती लागत को देखते हुए चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) बढ़ाए, 2025-26 के लिए 5 मिलियन टन चीनी को इथेनॉल में डायवर्ट करने का लक्ष्य घोषित करे, इथेनॉल मूल्य नीति में संशोधन करे और चीनी निर्यात नीतियों को अधिक प्रगतिशील बनाए।

YuvaSahakar Desk

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