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केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से लगा प्रतिबंध

भारत सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए रॉ, व्हाइट और रिफाइंड चीनी के निर्यात पर 30 सितंबर 2026 तक तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि, कतिपय कोटे (CXL/TRQ) और सरकारी समझौतों (G2G) के तहत होने वाले निर्यात को इस दायरे से बाहर रखा गया है।

Published: 11:24am, 14 May 2026

भारत सरकार ने देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से चीनी निर्यात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है। केंद्र सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह प्रतिबंध 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश जारी होने तक प्रभावी रहेगा। सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब देश में चीनी उत्पादन को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं और बाजार में कीमतों पर दबाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।

सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि यह प्रतिबंध रॉ शुगर, व्हाइट शुगर और रिफाइंड शुगर तीनों श्रेणियों पर लागू होगा। हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में निर्यात को छूट दी गई है। अधिसूचना के अनुसार यूरोपीय संघ (EU) और संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) को CXL और TRQ कोटे के तहत होने वाले निर्यात, एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम (AAS) के अंतर्गत किए जाने वाले निर्यात तथा अन्य देशों की खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सरकार-से-सरकार आधार पर होने वाली शिपमेंट इस प्रतिबंध से बाहर रहेंगी।

इसके अलावा सरकार ने उन खेपों को भी राहत दी है जिनकी निर्यात प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। जिन शिपमेंट की लोडिंग अधिसूचना जारी होने से पहले शुरू हो चुकी थी या जिनका शिपिंग बिल पहले ही दाखिल किया जा चुका है, उन्हें निर्यात की अनुमति प्रदान की जाएगी। साथ ही जो माल पहले ही सीमा शुल्क विभाग को सौंपा जा चुका है, उसे भी निर्धारित शर्तों के अनुसार निर्यात किया जा सकेगा।

सरकार का यह निर्णय घरेलू बाजार में सप्लाई बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक और ब्राजील के बाद प्रमुख चीनी निर्यातक देश है। इससे पहले केंद्र सरकार ने मिलों को लगभग 15 लाख मीट्रिक टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी। रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक स्वीकृत निर्यात में करीब 8 लाख टन चीनी के अनुबंध किए जा चुके हैं, जबकि 6 लाख टन से अधिक चीनी का निर्यात भी किया जा चुका है।

हालांकि अब गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में कमजोर पैदावार और मौसम संबंधी जोखिमों ने उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अल नीनो के संभावित प्रभाव के कारण अगले सीजन में गन्ने की फसल प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। सरकार को आशंका है कि लगातार दूसरे वर्ष देश में चीनी उत्पादन घरेलू खपत से कम रह सकता है। ऐसे में निर्यात पर रोक लगाकर घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने का प्रयास किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के इस फैसले का असर वैश्विक बाजार पर भी दिखाई देगा। भारत के निर्यात रुकने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की उपलब्धता घट सकती है, जिससे वैश्विक कीमतों को समर्थन मिलने की संभावना है। इसका फायदा ब्राजील और थाईलैंड जैसे बड़े चीनी निर्यातक देशों को मिल सकता है, जो एशिया और अफ्रीका के बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का प्रयास करेंगे।

YuvaSahakar Desk