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सहकारी शक्ति का विस्तार: भारत ने बनाईं 19,619 नई सहकारी समितियां, 2 लाख का लक्ष्य

देशभर में सहकारिता को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी पहल की है। सहकारिता मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 19,619 बहुउद्देशीय सहकारी समितियों का गठन हो चुका है। इस अभियान का उद्देश्य हर पंचायत तक ऋण, बाजार और जरूरी सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है।

Published: 14:33pm, 29 Apr 2025

भारत सरकार ने सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए 15 फरवरी, 2023 से 25 अप्रैल, 2025 के बीच 19,619 नई बहुउद्देशीय सहकारी समितियों की स्थापना की है। राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस के अनुसार, इनमें प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (PACS), आदिवासी मल्टी पर्पस सोसाइटी (LAMPS) और मत्स्य सेवा समितियां (FSS) शामिल हैं। सहकारिता मंत्रालय ने हाल ही में अपने एक ट्वीट में इस उपलब्धि का उल्लेख किया।

यह कदम सरकार की उस महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है, जिसके तहत पांच वर्षों में 2 लाख बहुउद्देशीय PACS, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियां स्थापित की जाएंगी। इसका लक्ष्य हर पंचायत तक सहकारी सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में यह पहल ग्रामीण भारत में समावेशी विकास और सहकारी क्षेत्र को पुनर्जनन देने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

मार्च 2023 में लॉन्च राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस में 7.91 लाख से अधिक सहकारी समितियों का मानचित्रण किया गया है, जिनके 2.98 करोड़ सदस्य हैं। यह डेटाबेस सहकारी समितियों की व्यापक और प्रमाणिक जानकारी प्रदान करता है। नई समितियां ग्रामीण समुदायों को ऋण, बाजार और आवश्यक सेवाएं प्रदान कर सशक्त बनाएंगी, साथ ही रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को बढ़ावा देंगी।

सरकार ने PACS के लिए आदर्श उपनियम लागू किए हैं, जो किसानों को डेयरी, मत्स्य पालन, भंडारण सहित 25 से अधिक व्यवसाय करने में सक्षम बनाते हैं। इन उपनियमों को 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनाया है, जिससे सहकारी आंदोलन को और बल मिला है। यह पहल ग्रामीण भारत को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और सहकारिता के माध्यम से समृद्धि लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

YuvaSahakar Desk

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