वासुदेवन भास्करन अपने जमाने के बेहतरीन लेफ्ट हाफ और भारत की आठवीं और आखिरी बार मास्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम के कप्तान, 1973 में एम्सटर्डम में दूसरे हॉकी विश्व कप और 1974 में तेहरान और 1978 में बैंकॉक में एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने वाली टीम के सदस्य रहे। 75 बरस के भास्करन भारत की 2000 में सिडनी ओलंपिक और दो विश्व कप 1998 में उत्रेक्त (नीदरलैंड) और 2006 (जर्मनी), 2006 में दोहा एशियाई खेलों में शिरकत करने वाली सीनियर पुरुष हॉकी टीम के चीफ कोच रहे और साथ ही 1997 में मिल्टन कींस में जूनियर हॉकी विश्व कप में रजत पदक जीतने वाली टीम के चीफ कोच रहे।
भास्करन की गिनती देश के ऐसे दिग्गज हॉकी कोच के रूप में होती तो मॉडर्न हॉकी को बढ़िया ढंग से समझते हैं। 15अगस्त से बेल्जियम और नीदरलैंड में शुरू होने वाले पुरुष हॉकी विश्व कप में भारत की तैयारियों और संभावनाओं की बाबत पूछे जाने पर भास्करन कहते हैं,‘ बेशक हॉकी विश्व कप का फॉर्मेट बदला गया है। यह क्यों बदला और इसे बदलने की सोच की बाबत तो एफआईएच ही बेहतर बता सकती है। जहां तक हमारी भारतीय हॉकी टीम की बात है तो एफआईएच प्रो हॉकी लीग के आखिरी चरण के बेंगलुरू में भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) में टीम की तैयारियां बहुत बढ़िया रही हैं। आक्रामक सेंटर हाफ के रूप में मनप्रीत सिंह और स्ट्राइकर मनदीप सिंह अपना लगातार चौथा हॉकी विश्व कप खेलने जा रहे हैं और पांच खिलाड़ियों का यह तीसरा विश्व कप है और कुल मिलाकर हमारी टीम खासी अनुभवी है। पूरी भारतीय हॉकी टीम लंबे समय से साथ खेल रही है और सभी की बढ़िया जुगलबंदी बन गई है। हमारी भारतीय पुरुष हॉकी टीम विश्व कप में पहले चरण पूल डी में वेल्स, इंग्लैंड और चिर प्रतिद्वंद्वी पाकि्स्तान के साथ है। मुझे भारतीय हॉकी टीम के पूल डी में शीर्ष दो में रहकर दूसरे दौर में पहुंचने में कोई संदेह ही नहीं है। नए फॉर्मेट में क्वॉर्टर फाइनल नहीं है और दूसरे चरण से चूंकि दो शीर्ष टीमें विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंचेगी। मेरा मानना यह है कि इस फॉर्मेट में अच्छी बात यह है कि हमें सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए एक और मैच मिल जाएगा। मुझे पूरा विश्वास है हमारी भारतीय पुरुष टीम हॉकी विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंचेगी। हमारी टीम इस समय पूरी तरह फिट है और इसमें टीम को एफआईएच प्रो लीग सहित विश्व कप के लिए विदेशी दौरों पर पर्याप्त मैच खेलने को मिले हैं। ऐसे में भारतीय टीम को बेहतर प्रदर्शन कर अंतिम चार में स्थान बनाना ही चाहिए और इसके लिए किसी तरह के बहाने की कोई गुंजाइश नहीं है। हमारे खिलाड़ियों को पूरी तरह ध्यान सिर्फ और सिर्फ विश्व कप पर लगाना चाहिए। भारत को इस विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंचने और 1975 में आखिरी बाद स्वर्ण पदक जीतने के बाद फिर पहली बार पदक जीतना है तो टीम में हरेक खिलाड़ी को हर मैच में अपना 80 फीसदी देना ही होगा और इससे कम पर टीम का पूरा संतुलन ही गड़बड़ा जाएगा। मैं मानता हूं कि किसी मैच में कोई खिलाड़ी कोई गलती कर सकता है और लेकिन यह भी महज 15 फीसदी तक ही। निरंतर बढ़िया प्रदर्शन करने वाली सह मेजबान बेल्जियम व नीदरलैंड व जर्मनी व बराबर बेहतर होती जा रही स्पेन बेशक 2026 के विश्व कप में खिताब के प्रबल दावेदार हैं। भारत का मौजूदा प्रदर्शन भी उसके 51 बरस के बाद हॉकी विश्व कप में फिर पदक जीतने की आस बंधाता है।
वह कहते हैं,‘ हमारी भारतीय टीम की ताकत उसकी मनप्रीत सिंह,हार्दिक सिंह, विवेक सागर प्रसाद, नीलकांत शर्मा जैसे अनुभवी और नौजवान राजिंदर सिंह व यशदीप सिवाच के रूप में मजबूत मध्यपंक्ति है। हमारे पास अनुभवी मनदीप सिंह के साथ अग्रिम पंक्ति में अभिषेक नैन, सुखजीत सिंह, दिलप्रीत सिंह और शिलानंद लाकरा के रूप में नौजवान पर अब खासे अनुभवी हो चुके स्ट्राइकर हैं। रक्षापंक्ति में कप्तान हरमनप्रीत सिंह, अमित रोहिदास, जुगराज सिंह ,जर्मनप्रीत सिंह जैसे ड्रैग फ्लिकर व फुलबैण हैं ही सुमित जैसा बहुत चतुर डिफेंडर है जो की बहुत ही चतुराई से आगे बढ़ कर चौंकाते हुए गोल तक कर सकता है। बेशक कप्तान हरमनप्रीत सिंह के रूप में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ड्रैग फ्लिकरों मे एक ड्रैग फ्लिकर हैं। अच्छी बात यह है कि हमारी भारतीय हॉकी टीम पेनल्टी कॉर्नर पर ड्रैग फ्लिक पर गोल करने के लिए केवल हरमनप्रीत पर ही निर्भर नहीं है क्योंकि जुगराज सिंह और नौजवान राजिंदर अपने ड्रैग फ्लिक से गोल कर किसी भी टीम को चौंकाने में सक्षम हैं। बेशक नौजवान गोलरक्षक मोहित और सूरज करकेरा का यह पहला हॉकी विश्व कप होगा , लेकिन एफआईएच प्रो हॉकी लीग सहित दोनों ने भारत के लिए विश्व मंच पर अब तक बेहतरीन प्रदर्शन किया है और फिलहाल यही दोनों देश में उपलब्ध दो सर्वश्रेष्ठ गोलरक्षक हैं।’
भास्करन कहते हैं, ‘भले ही भारतीय हॉकी टीम के मौजूदा चीफ कोच क्रेग फुल्टन का जोर पहले अपने किले की चौकसी पर है। हर कोच को अपनी रणनीति के मुताबिक टीम को खिलाने की छूट होनी चाहिए। अच्छी बात यह है हमारी भारतीय टीम के पास बढ़िया स्ट्राइकर और मजबूत अग्रिम पंक्ति है। हमारी अग्रिम पंक्ति में अभिषेक, सुखजीत, दिलप्रीत, मनदीप व शिलानंद को मैदानी गोल करने के साथ ज्यादा पेनल्टी कॉर्नर बनाने चाहिए क्योंकि टीम के पास हरमनप्रीत सिंह और जुगराज के रूप में इसे गोल में बदलने वाले ड्रैग फ्लिकर हैं। गोरे यानी यानि यूरोपीय खिलाड़ियों की कोशिश भारतीय टीम के प्रमुख स्ट्राइकरो घेरेबंदी करने की रहेगी। ऐसे में इस घेरेबंदी को तोड़ने के लिए टीम के पास प्लान बी होना चाहिए। मुझे पूरी उम्मीद है कि भारत के कोच फल्टन और टीम ने इस बात को जेहन में रखकर बेशक इससे निपटने के लिए प्लान बी होगा।भारतीय हॉकी टीम को अपना पूरा ध्यान विश्व कप पर लगाना चाहिए। भारत को एक विश्व कप के बाद एक पखवाड़े का वक्त आगे आईची-नगोया (जापान) में होने वाले अहम एशियाई खेलों की तैयारियों के लिए मिलेगा। भारत को एशियाई खेलों में भी एक दो मैचों को छोड़ कर कोई चुनौती नहीं मिलती नहीं लगती और हमें इसमें अपना स्वर्ण पदक बरकरार रख कर सीधे 2028 के अटलांटा ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई करना चाहिए।’


