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NEET परीक्षा में हाईटेक चीटिंग, बायोमेट्रिक सिस्टम हैक कर बैठाए गए सॉल्वर

लखीसराय के एसडीपीओ शिवम कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में प्रत्येक अभ्यर्थी से 10 से 12 लाख रुपये में सौदा तय होने की जानकारी मिली है

Published: 10:32am, 22 Jun 2026

रविवार को आयोजित नीट यूजी री-एग्जाम में सॉल्वर गैंग के भंडाफोड़ के बाद जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह ने परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था में सेंध लगाकर पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। बायोमेट्रिक जांच से जुड़े कुछ कर्मियों की कथित मिलीभगत से फर्जी परीक्षार्थियों को वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिलाया गया और वे परीक्षा में शामिल हुए।

पुलिस सूत्रों के अनुसार पावापुरी मेडिकल कॉलेज, राजगीर का छात्र रविशंकर इस नेटवर्क का मुख्य संचालक था। उसने विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत छात्रों को सॉल्वर के रूप में तैयार किया और उन्हें परीक्षा में बैठाने की योजना बनाई। जांच में पता चला है कि बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया को प्रभावित कर सॉल्वरों को केंद्र के भीतर पहुंचाया गया, जिसके बाद उन्होंने असली अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा दी।

अब तक गिरफ्तार किए गए नौ सॉल्वर सभी मेडिकल छात्र बताए जा रहे हैं। इनके अलावा बायोमेट्रिक एजेंसी के कर्मचारी और गिरोह के अन्य सदस्यों सहित कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार आरोपियों में एक मूल परीक्षार्थी भी शामिल है। पुलिस कई अन्य संदिग्धों से पूछताछ कर रही है और उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने पर नेटवर्क तथा आर्थिक लेन-देन से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं।

लखीसराय के एसडीपीओ शिवम कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में प्रत्येक अभ्यर्थी से 10 से 12 लाख रुपये में सौदा तय होने की जानकारी मिली है। इसमें 1 से 2 लाख रुपये अग्रिम लिए गए थे, जबकि शेष रकम परीक्षा में सफलता और नामांकन के बाद दी जानी थी। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल कॉल डिटेल और डिजिटल ट्रांजैक्शन की भी जांच कर रही है। वहीं, केंद्रीय विद्यालय लखीसराय के प्रभारी प्राचार्य सह सिटी कोऑर्डिनेटर दिनेश कुमार भगत के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस पूरे रैकेट में शामिल लोगों की भूमिका की गहन जांच कर रही है।

YuvaSahakar Desk