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भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों के खुलेंगे कैंपस, अब ग्लोबल डिग्री के लिए विदेश जाना नहीं होगा जरूरी

भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों के आने से छात्रों की पढ़ाई का खर्च विदेश की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत तक कम होगा

Published: 11:08am, 29 Jun 2026

विदेश में उच्च शिक्षा का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए बड़ी राहत की खबर है। केंद्र सरकार अब तक 15 विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस खोलने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) जारी कर चुकी है। इनमें से अधिकांश विश्वविद्यालय अगस्त 2026 से अपने पहले शैक्षणिक सत्र की शुरुआत करेंगे। इससे छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा, डिग्री और फैकल्टी भारत में ही उपलब्ध होगी, जिससे विदेश जाकर पढ़ाई करने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो जाएगी।

शुरुआती चरण में प्रत्येक कैंपस में 200 से 250 छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा। अगले पांच वर्षों में प्रत्येक कैंपस की क्षमता बढ़ाकर 1,000 से 1,200 छात्रों तक करने का लक्ष्य रखा गया है। मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु में यूनिवर्सिटी ऑफ एबरडीन, ब्रिस्टल, यॉर्क, इलिनोइस टेक, लिवरपूल और विक्टोरिया यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान अपने कैंपस शुरू कर रहे हैं। इन संस्थानों में मौजूदा सत्र के लिए 10 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं।

प्रवेश के लिए सामान्यतः 12वीं में कम से कम 75 प्रतिशत अंक तथा स्नातक स्तर पर 55 से 70 प्रतिशत अंक आवश्यक होंगे। यदि बोर्ड परीक्षा में अंग्रेजी विषय में 70 से 85 प्रतिशत अंक हैं, तो अधिकांश मामलों में IELTS की आवश्यकता नहीं होगी। पढ़ाई, परीक्षा, मूल्यांकन और डिग्री पूरी तरह विदेशी विश्वविद्यालयों के होम कैंपस के वैश्विक मानकों के अनुरूप होगी। पहले चरण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंप्यूटर साइंस और STEM विषयों पर विशेष फोकस रहेगा।

छात्रों को एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत 1 से 2 सेमेस्टर विदेश में पढ़ने का अवसर भी मिलेगा। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी, वैश्विक एलुमनाई नेटवर्क और बेहतर रोजगार अवसरों का लाभ मिलेगा। विश्वविद्यालयों ने करीब 1,000 करोड़ रुपये का स्कॉलरशिप फंड भी निर्धारित किया है, जिसके तहत योग्य और जरूरतमंद छात्रों को 10 से 100 प्रतिशत तक छात्रवृत्ति दी जाएगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों के आने से छात्रों की पढ़ाई का खर्च विदेश की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत तक कम होगा। साथ ही डेलॉय और नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट के मुताबिक 2040 तक भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस में 5.6 लाख से अधिक छात्र अध्ययन कर सकते हैं, जिससे लगभग 113 अरब डॉलर (करीब 10.67 लाख करोड़ रुपये) की विदेशी मुद्रा देश से बाहर जाने से बच सकती है। यह पहल भारत को वैश्विक शिक्षा केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

YuvaSahakar Desk