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मध्य प्रदेश सरकार ने PDS में किया बड़ा बदलाव, अब 2 किलो की जगह मिलेगा 4 किलो गेहूं

यह निर्णय मध्य प्रदेश के 1 करोड़ 28 लाख 86 हजार पात्र परिवारों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा, जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत PDS से लाभान्वित हैं। इस बदलाव का उद्देश्य खाद्यान्न की कालाबाजारी पर अंकुश लगाना और स्थानीय खानपान की प्राथमिकताओं के अनुरूप वितरण सुनिश्चित करना है।

Published: 15:52pm, 12 Aug 2025

मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गेहूं और चावल वितरण के अनुपात में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब राजधानी भोपाल सहित पूरे प्रदेश में प्रत्येक पात्र व्यक्ति को प्रति माह 4 किलो गेहूं और 1 किलो चावल मिलेगा। पूर्व व्यवस्था के अनुसार, 2 किलो गेहूं और 3 किलो चावल वितरित किया जाता था।

राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद राजपूत ने बताया कि प्रदेश में गेहूं की खपत अधिक और चावल की खपत कम होने के बावजूद, PDS में चावल की मात्रा अधिक रखी गई थी। इस कारण चावल की कालाबाजारी बढ़ रही थी, जबकि जरूरतमंदों को पर्याप्त गेहूं नहीं मिल पा रहा था। इस विसंगति को दूर करने के लिए उन्होंने केंद्र सरकार के खाद्य मंत्री प्रहलाद जोशी से मुलाकात कर 75% गेहूं और 25% चावल के अनुपात को लागू करने का अनुरोध किया था।

केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए नया आदेश जारी किया है। नई व्यवस्था से राज्य में गरीबों को उनकी खाद्य आदतों के अनुरूप अनाज उपलब्ध होगा और चावल की अवैध बिक्री पर प्रभावी रोक लगेगी। यह बदलाव प्रदेश की खाद्य आपूर्ति प्रणाली को अधिक संतुलित और पारदर्शी बनाएगा।

मध्य प्रदेश में गेहूं और आटे का उपयोग व्यापक स्तर पर होता है, जबकि चावल की खपत अपेक्षाकृत कम है। पहले की व्यवस्था में चावल की अधिक मात्रा के कारण PDS हितग्राही इसे बाजार में कम दामों पर बेच देते थे, जिससे कालाबाजारी को बढ़ावा मिल रहा था। नई व्यवस्था से यह समस्या काफी हद तक नियंत्रित होगी, क्योंकि अब गेहूं की मात्रा बढ़ाकर लोगों की प्राथमिकताओं के अनुरूप खाद्यान्न वितरण किया जाएगा। इस बदलाव से प्रति माह 1 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त गेहूं की आपूर्ति होगी।

YuvaSahakar Desk