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पैक्स से जुड़ेंगी केंद्र की सभी योजनाएं, आधुनिक टेक्नोलॉजी से भी होंगे लैसः डॉ. भूटानी

डॉ. भूटानी ने कहा कि देश में करीब 2000 बैंकिंग लाइसेंस में से 1900 लाइसेंस सहकारी क्षेत्र में हैं, 100 लाइसेंस अन्य बैंकों के पास हैं। सहकारी बैंकों की तकनीकी सीमाएं रही हैं, लेकिन RBI, वित्त मंत्रालय और आयकर विभाग के साथ मिलकर इन चुनौतियों का समाधान कर रहा है।

Published: 12:43pm, 02 Jul 2025

प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए इनका कंप्युटरीकरण किया जा रहा है। केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय ने अब 80,000 पैक्स का कंप्युटरीकरण करने का लक्ष्य रखा है। पैक्स के डिजिटलीकरण के बाद इन्हें समावेशी, जीवंत, निर्बाध और कुशलतापूर्वक कार्य करने लायक बनाया जाएगा। इसके लिए इन्हें उभरती टेक्नोलॉजी से जोड़ा जाएगा, ताकि किसानों और ग्रामीणों को इनके माध्यम से हर तरीके की सुविधाएं मिल सकें। केंद्रीय सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने ‘पैक्स में उभरती प्रौद्योगिकियों’ पर आयोजित एक कार्यशाला में यह जानकारी दी।

नई दिल्ली स्थित पीएचडी हाउस में “पैक्स में उभरती प्रौद्योगिकियां” विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने उदघाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा, ‘हमारे किसानों और ग्रामीणों को मौसम संबंधी, आपदा संबंधी, वर्षा पूर्वानुमान, कीट हमले संबंधी सलाह की आवश्यकता है। आज ऐसी नई तकनीकें उपलब्ध हैं, जिन्हें हमारे ग्रामीण भारत को जागरूक और मजबूत बनाने के लिए सिस्टम से जोड़ा जा सकता है। पैक्स कम्प्युटरीकरण योजना में अब तक लगभग 3,000 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। अब लक्ष्य 80,000 पैक्स का कम्प्युटरीकरण करना और भारत सरकार की सभी योजनाओं को पैक्स के साथ एकीकृत करके उन्हें जीवंत आर्थिक और सामाजिक संस्थाओं में बदलना है।’

उन्होंने कहा कि PACS में ग्रामीण भारत के लिए “वन स्टॉप शॉप” बनने की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता है। आने वाले समय में केंद्र सरकार की सभी योजनाओं को पैक्स से जोड़ा जाएगा। डॉ. भूटानी ने कहा कि देश में करीब 2000 बैंकिंग लाइसेंस में से 1900 लाइसेंस सहकारी क्षेत्र में हैं, 100 लाइसेंस अन्य बैंकों के पास हैं। सहकारी बैंकों की तकनीकी सीमाएं रही हैं, लेकिन RBI, वित्त मंत्रालय और आयकर विभाग के साथ मिलकर इन चुनौतियों का समाधान कर रहा है।

डॉ. भूटानी ने PACS को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर और पारदर्शी संस्थान बनाने पर बल दिया। PACS को कृषि ऋण से आगे बढ़ाकर 26 प्रकार की गतिविधियों को करने के लिए मॉडल बायलॉज बनाए गए। सहकारिता मंत्रालय ने 4 साल की छोटी सी अवधि में सहकारिता के विभिन्न आयामों से जुड़ी 60 से अधिक पहल शुरू की हैं। उन्होंने राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस के निर्माण और 80,000 PACS के कम्प्यूटरीकरण के लक्ष्य को सहकारिता मंत्रालय की बड़ी उपलब्धि बताया।

इस अवसर पर PHDCCI के सीईओ रंजीत मेहता, सहकारिता मंत्रालय, NABARD, NCDC, NFDB, NCCT, IFFCO, KRIBHCO समेत कई संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यशाला में 12 राज्यों से PACS के 122 सदस्यों ने भाग लिया। मुख्य चर्चा के विषयों मे डिजिटल इंडिया के युग में पैक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट तकनीक, फिनटेक, नीति नवाचार और विभिन्न राज्यों की सफलता की कहानियां शामिल रहीं। डॉ. भूटानी ने बताया कि देश में 1 लाख से अधिक PACS हैं, जिनके 13 करोड़ से अधिक सदस्य हैं। PACS ने ग्रामीण भारत के छोटे किसानों को लाभ पहुंचाया है और अब ऋण लाभार्थियों की संख्या 42% तक पहुंच गई है।

कार्यक्रम में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत पौधारोपण भी किया गया और प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

YuvaSahakar Desk

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