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सहकारिता मंत्रालय के गठन के 4 वर्ष पूर्ण, अमित शाह त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय का भूमि पूजन

अमित शाह ने कहा कि भारत में सहकारिता वैदिक काल से समाज के संस्कार के रूप में विद्यमान है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने चार वर्ष पूर्व 6 जुलाई को सहकारिता मंत्रालय की स्थापना कर इसे विधायी रूप प्रदान किया। यह मंत्रालय देश की 8 लाख 40 हजार से अधिक सहकारी समितियों और लगभग 31 करोड़ लोगों को जोड़कर उनके आर्थिक विकास में योगदान दे रहा है

Published: 11:48am, 07 Jul 2025

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रविवार, 6 जुलाई को गुजरात के आणंद में आयोजित एक समारोह में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के चार वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में कई नई योजनाओं व पहलों की शुरुआत की। इस कार्यक्रम का आयोजन गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (GCMMF) द्वारा किया गया था।

इस अवसर पर अमित शाह ने खेड़ा स्थित अमूल चीज प्लांट और मोगर स्थित अत्याधुनिक चॉकलेट प्लांट के विस्तार का वर्चुअली उद्घाटन किया। इसके साथ ही आणंद में नेशनल कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन ऑफ इंडिया (NCDFI) के नए कार्यालय भवन, NDDB परिसर में मणिबेन पटेल भवन तथा रेडी-टू-यूज़ कल्चर संयंत्र का लोकार्पण भी किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रीअमित शाह ने कहा कि सहकारिता भारत की वैदिक परंपरा का अंग है और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सहकारिता मंत्रालय की स्थापना कर इस परंपरा को विधायी पहचान दी गई। उन्होंने बताया कि आज देश में 8.4 लाख से अधिक सहकारी समितियां हैं, जो 31 करोड़ से अधिक लोगों से जुड़ी हैं और राष्ट्र के आर्थिक विकास में सहायक बन रही हैं।

श्री शाह ने बताया कि सहकारिता मंत्रालय द्वारा बीते 4 वर्षों में 60 से अधिक पहल की गई हैं, जो पांच प्रमुख स्तंभों – People, PACS, Platform, Policy और Prosperity पर आधारित हैं:

  1. People (जनता) – सभी योजनाएं आम नागरिकों को लाभ पहुंचाने के लिए हैं।

  2. PACS (प्राथमिक सहकारी समितियां) – इन समितियों को सशक्त किया जा रहा है।

  3. Platform (डिजिटल प्लेटफॉर्म) – सहकारी गतिविधियों के लिए राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए गए हैं।

  4. Policy (नीतियां) – जैसे नमक उत्पादन का मुनाफा अब उत्पादकों को देने की नीति लागू की गई है।

  5. Prosperity (समृद्धि) – इसका लाभ केवल अमीरों को नहीं, बल्कि मजदूरों, किसानों, वंचित वर्गों को मिलना चाहिए।

उन्होंने सहकारिता वर्ष में तीन बिंदुओं को लागू करने की अपील की – पारदर्शिता, तकनीकी स्वीकृति और सदस्य को केंद्र में रखना। शाह ने चेताया कि इन सिद्धांतों के बिना कोई सहकारी संस्था लंबे समय तक नहीं चल सकती।

इससे पूर्व, 5 जुलाई को गृह मंत्री ने आणंद में देश के पहले सहकारी विश्वविद्यालय ‘त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय’ का भूमि पूजन किया। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय सहकारी क्षेत्र में व्याप्त भाई-भतीजावाद को समाप्त करेगा और पारदर्शिता तथा जवाबदेही को बढ़ावा देगा।

अमित शाह ने बताया कि पहले सहकारी संस्थानों में नियुक्ति के बाद प्रशिक्षण दिया जाता था, लेकिन अब केवल प्रशिक्षित युवाओं को ही सहकारिता क्षेत्र में अवसर मिलेंगे। विश्वविद्यालय में तकनीकी दक्षता, लेखा प्रणाली, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, विपणन कौशल और सामाजिक मूल्यों जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे।

गृह मंत्री ने बताया कि देश में दो लाख नई प्राथमिक कृषि साख समितियां (PACS) बनाई जाएंगी, जिनमें से 60,000 PACS वर्ष के अंत तक तैयार होंगी। केवल PACS में 17 लाख कर्मचारियों की आवश्यकता होगी, जिन्हें यह विश्वविद्यालय प्रशिक्षित करेगा। विश्वविद्यालय नीति निर्माण, डेटा विश्लेषण, रणनीति निर्धारण और अनुसंधान को भी बढ़ावा देगा।

अंत में अमित शाह ने कहा कि यह सहकारी क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक क्षण है और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा त्रिभुवनदास पटेल को यह सच्ची श्रद्धांजलि है।

YuvaSahakar Desk