Trending News

अमेरिका-ईरान जंग खत्म करने पर बनी सहमति, 19 जून को समझौते पर होगा दस्तखत, होर्मुज फिर खुलेगा लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे नए आर्मी चीफ, 30 जून से पदभार संभालेंगे 100% एथेनॉल से चलेंगी गाड़ियां, केंद्र सरकार ने दी मंजूरी जेवर एयरपोर्ट से यात्री उड़ानों का आगाज, लखनऊ से पहुंची पहली फ्लाइट का हुआ भव्य स्वागत टीएमसी के बागी सांसदों का नया ठिकाना, सीधे 20 सांसदों वाली पार्टी बनी NCPI अमेरिका-ईरान जंग खत्म करने पर बनी सहमति, 19 जून को समझौते पर होगा दस्तखत, होर्मुज फिर खुलेगा लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे नए आर्मी चीफ, 30 जून से पदभार संभालेंगे 100% एथेनॉल से चलेंगी गाड़ियां, केंद्र सरकार ने दी मंजूरी जेवर एयरपोर्ट से यात्री उड़ानों का आगाज, लखनऊ से पहुंची पहली फ्लाइट का हुआ भव्य स्वागत टीएमसी के बागी सांसदों का नया ठिकाना, सीधे 20 सांसदों वाली पार्टी बनी NCPI

छत्तीसगढ़ सरकार की ‘लाख से लखपति’ योजना: कम लागत, अधिक मुनाफा और जंगल की रक्षा

छत्तीसगढ़ सरकार की "लाख से लखपति" योजना के माध्यम से पारंपरिक लाख कीट पालन को एक संगठित ग्रामीण व्यवसाय का रूप दिया जा रहा है। किसानों को मुफ्त प्रशिक्षण, बीहन लाख, ब्याज मुक्त ऋण और विपणन सहायता देकर आयवर्धन के साथ-साथ वन संरक्षण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

Published: 12:28pm, 18 Jul 2025

छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और वनवासियों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए ‘लाख से लखपति’ योजना शुरू की है, जो लाख कीट पालन को एक बड़े ग्रामीण व्यवसाय के रूप में स्थापित कर रही है। विशेष रूप से बस्तर जैसे वनक्षेत्रों में यह योजना किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखती है। इस योजना के तहत सरकार किसानों को वैज्ञानिक तरीके से लाख कीट पालन का प्रशिक्षण, मुफ्त या रियायती दर पर बीहन लाख, ब्याज मुक्त ऋण और बाजार तक पहुंच प्रदान कर रही है। यह न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जंगलों की सुरक्षा में भी योगदान दे रही है।

लाख कीट पालन कोई नई अवधारणा नहीं है, लेकिन इसे वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से अपनाने की जरूरत को छत्तीसगढ़ सरकार ने पहचाना है। राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 4000 मीट्रिक टन लाख का उत्पादन होता है, जो कुसुम, पलाश और बेर जैसे पेड़ों पर पाले जाने वाले कीटों से प्राप्त होता है। ये कीट एक विशेष प्रकार की प्राकृतिक राल (रेजिन) उत्पन्न करते हैं, जिसका उपयोग पेंट, वार्निश, सजावटी सामग्री और दवाइयों के निर्माण में होता है। भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी लाख की मांग लगातार बनी हुई है, जिससे यह किसानों के लिए एक लाभकारी व्यवसाय बन गया है।

हाल ही में बस्तर जिले के माचकोट परिक्षेत्र के जीरागांव में छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा लाख कीट पालन को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर बस्तर सांसद महेश कश्यप ने बेर के पेड़ पर बीहन लाख बांधकर किसानों को इस व्यवसाय के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि थोड़ी मेहनत और जंगल के प्रति समर्पण से किसान लाखों की कमाई कर सकते हैं। इस कार्यक्रम में तेंदूपत्ता संग्राहकों को चरण पादुका भी वितरित की गई, ताकि जंगल में कार्य करते समय उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ इस योजना को जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। संघ द्वारा किसानों को मुफ्त या रियायती बीहन लाख उपलब्ध कराई जा रही है, साथ ही प्रशिक्षण और ब्याज मुक्त ऋण की सुविधा भी दी जा रही है। इसके अतिरिक्त, सरकार लाख की बिक्री और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित कर रही है, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने में कोई परेशानी न हो। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें लागत बहुत कम है, क्योंकि पलाश, कुसुम और बेर जैसे पेड़ पहले से ही जंगलों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।

लाख कीट पालन न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी है, बल्कि यह पर्यावरण के अनुकूल भी है। यह जंगलों की सुरक्षा में योगदान देता है, क्योंकि इसके लिए पेड़ों को काटने की आवश्यकता नहीं होती। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, आर्थिक सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करती है। बस्तर जैसे क्षेत्रों में, जहां वन संपदा प्रचुर है, यह योजना किसानों के लिए एक नया आय स्रोत बन रही है।

YuvaSahakar Desk