वैश्विक मंच पर बिहार की सहकारी क्रांति, विदेशों में पहुंच रही किसानों की उपज

बिहार के किसानों की उपज अब दुबई, सिंगापुर और नेपाल तक पहुंच रही है। सहकारिता मंत्री ने बताया कि हर सप्ताह 45 मीट्रिक टन उपज का निर्यात ट्रायल पर है, और राज्य भर में कोल्ड स्टोरेज के निर्माण से किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा।

Published: 16:10pm, 10 Jun 2025

बिहार की सहकारी संस्थाएं अब वैश्विक स्तर पर अपनी अहम उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के अंतर्गत आयोजित एक जिला स्तरीय कार्यशाला में सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने बताया कि राज्य के किसानों द्वारा सहकारी समितियों के माध्यम से उत्पादित फल और सब्जियों का निर्यात शुरू हो गया है।

डॉ. कुमार ने जानकारी दी कि हाल ही में बिहार से 1500 किलोग्राम सब्जियां और फल दुबई भेजे गए, जिसमें परवल, करैला, बैंगन, कटहल, केला और जर्दालु आम समेत कुल 10 प्रकार की कृषि उपज शामिल थीं। इसके अतिरिक्त, नेपाल से 5000 किलो उपज की मांग प्राप्त हुई है और सिंगापुर से भी डिमांड आई है।

उन्होंने बताया कि अभी हर सप्ताह 45 मीट्रिक टन फल-सब्जियों के निर्यात का ट्रायल चल रहा है, जो राज्य के किसानों की आय में वृद्धि की दिशा में एक बड़ा कदम है। साथ ही, प्रत्येक प्रखंड में 10 मीट्रिक टन क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज का निर्माण कराया जा रहा है। प्रथम चरण में यह योजना 52 प्रखंडों में लागू की जा रही है, जहां प्रति यूनिट ₹1.14 करोड़ की लागत आएगी।

मंत्री ने यह भी बताया कि सहकारी समितियों को डिजिटल और आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए पैक्स कम्प्यूटरीकरण, कॉमन सर्विस सेंटर, माइक्रो एटीएम, किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाएं लागू की गई हैं। डोर स्टेप बैंकिंग सेवा ने विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं और बुजुर्गों को राहत पहुंचाई है। इस कार्यशाला में औरंगाबाद जिले की 12 समितियों को माइक्रो एटीएम वितरित किए गए।

YuvaSahakar Desk