रांची स्थित रिम्स में एमबीबीएस एडमिशन और टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच अब तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर बुधवार को CID की दो टीमों ने रिम्स पहुंचकर डीन कार्यालय, निदेशक कार्यालय और डेटा सेंटर समेत कई विभागों में छानबीन की। शुरुआती जांच में एमबीबीएस के करीब एक दर्जन छात्रों के दाखिले में फर्जीवाड़े के संकेत मिले हैं।
जांच के दौरान स्थानीयता, जाति और अन्य प्रमाण पत्रों में गड़बड़ियां सामने आईं। साहिबगंज के दो सगे भाई-बहनों का प्रवेश भी संदिग्ध पाया गया है। CID ने सभी छात्रों के एडमिशन से जुड़े दस्तावेजों की प्रतियां जब्त कर ली हैं और पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रही है।
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि रिम्स ही नहीं, राज्य के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन प्रक्रिया की जांच होगी। इसके लिए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। उन्होंने कहा कि फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए योग्य छात्रों के अधिकारों पर डाका डाला गया है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, जांच का दायरा बढ़ाते हुए रिम्स के अधिकारियों और कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा सकती है। हाल ही में एक छात्रा द्वारा कथित रूप से फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर एसटी कोटे में दाखिला लेने का मामला सामने आने के बाद कई अन्य शिकायतें भी मिली थीं। अब CID पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है, जिससे आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।


