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NCERT की कक्षा 6 की कन्नड़ किताब ‘कृष्णा’ पर विवाद, संगठन के आरोपों पर परिषद ने दी सफाई

विवाद बढ़ने के बाद NCERT ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सभी आरोपों पर सफाई दी

Published: 14:41pm, 25 Jun 2026

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की कक्षा 6 की नई कन्नड़ पाठ्यपुस्तक ‘कृष्णा’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और गहरा गया है। शिक्षा अधिकार संगठन पीपुल्स अलायंस फॉर फंडामेंटल राइट्स टू एजुकेशन (PAFRE) ने आरोप लगाया है कि नई पुस्तक के माध्यम से पाठ्यक्रम का ‘भगवाकरण’ किया जा रहा है। संगठन का कहना है कि पुस्तक में धार्मिक और पौराणिक विषयों को जरूरत से ज्यादा महत्व दिया गया है, जबकि कर्नाटक की सांस्कृतिक, साहित्यिक और सामाजिक विविधता को पर्याप्त स्थान नहीं मिला।

PAFRE के मुख्य संयोजक निरंजनराध्य वी.पी. ने सवाल उठाया कि पुस्तक का नाम ‘कृष्णा’ क्यों रखा गया। उनका कहना है कि कर्नाटक की पहचान आदिकवि पंप, कुवेम्पु, कोटा शिवराम कारंत और बसवन्ना जैसे साहित्यकारों और समाज सुधारकों से जुड़ी है, लेकिन पुस्तक में इनका पर्याप्त उल्लेख नहीं है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि संतुलित आहार वाले अध्याय में केवल शाकाहारी भोजन को प्रमुखता दी गई है, जबकि अंडा, मछली और मांस जैसे खाद्य पदार्थों को नजरअंदाज किया गया है। उनका कहना है कि इससे कर्नाटक की खाद्य विविधता का सही चित्रण नहीं होता।

विवाद बढ़ने के बाद NCERT ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सभी आरोपों पर सफाई दी। परिषद ने स्पष्ट किया कि उसकी भाषा की पुस्तकों के नाम भारत की प्रमुख नदियों के नाम पर रखे गए हैं। कन्नड़ पुस्तक ‘कृष्णा’ का नाम भगवान कृष्ण नहीं, बल्कि कृष्णा नदी के नाम पर रखा गया है। इसी तरह हिंदी की पुस्तक का नाम ‘गंगा’, अंग्रेजी की ‘कावेरी’ और उर्दू की ‘जमुना (यमुना)’ रखा गया है।

मांसाहारी भोजन को लेकर उठे सवालों पर भी NCERT ने कहा कि कक्षा 6 की पुस्तक के अध्याय 6 और ‘Balanced Diet’शीर्षक वाले पृष्ठ पर शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के खाद्य पदार्थों का उल्लेख और चित्र शामिल हैं। परिषद ने स्पष्ट किया कि पुस्तक में कहीं भी शाकाहारी भोजन का प्रचार या मांसाहार का विरोध नहीं किया गया है। NCERT का कहना है कि पुस्तक का उद्देश्य संतुलित पोषण की जानकारी देना है, न कि किसी विशेष खानपान या धार्मिक विचारधारा को बढ़ावा देना।

YuvaSahakar Desk