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अमृत सरोवरों से बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा, जीविका दीदियों को मिल रहा रोजगार

बिहार में अमृत सरोवर जीविका दीदियों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं, जहां मछली पालन के लिए नीतीश सरकार प्रतिवर्ष 5,000 रुपये का अनुदान दे रही है। अब तक 2,613 सरोवर विकसित किए गए हैं, जो जल संरक्षण, सिंचाई, मत्स्य पालन, मखाना उत्पादन और पर्यावरण सुधार में योगदान दे रहे हैं।

Published: 09:00am, 18 May 2025

बिहार सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मित अमृत सरोवर अब जल संचयन, सिंचाई, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन के मजबूत माध्यम बनते जा रहे हैं। विशेषकर महिला सशक्तिकरण की दिशा में यह योजना एक उल्लेखनीय कदम सिद्ध हो रही है। राज्य सरकार द्वारा जीविका दीदियों को मछली पालन के लिए प्रतिवर्ष 5 हजार रुपये का अनुदान प्रदान किया जा रहा है, जिससे उन्हें स्थानीय स्तर पर आजीविका का सशक्त साधन प्राप्त हो रहा है।

अब तक राज्य में कुल 2,613 अमृत सरोवरों का निर्माण पंचायती राज विभाग द्वारा किया जा चुका है। इन जल निकायों को 15वें वित्त आयोग के टाइड फंड की 30 प्रतिशत राशि से ग्राम पंचायत स्तर पर विकसित किया गया है। इनकी देखरेख पंचायती प्रतिनिधियों और त्रिस्तरीय पंचायत संस्थाओं द्वारा की जा रही है।

अमृत सरोवरों का न्यूनतम क्षेत्रफल दो एकड़ 30 डिसमिल निर्धारित किया गया है, जिससे व्यापक स्तर पर वर्षा जल का संग्रह हो रहा है। इससे भूजल स्तर में सुधार और आसपास की असिंचित भूमि की सिंचाई संभव हो पाई है। इसका सीधा लाभ स्थानीय किसानों को फसल उत्पादन में मिल रहा है।

सरकार द्वारा इन सरोवरों के चारों ओर मियावाकी पद्धति से पौधारोपण कराया गया है, जिससे पर्यावरण को स्थायित्व मिला है। बरगद और पीपल जैसे छायादार वृक्ष गर्मी में ग्रामीणों को विश्राम स्थल भी प्रदान कर रहे हैं।

अमृत सरोवर योजना अब न केवल जल प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण और स्थानीय रोजगार सृजन का भी सशक्त माध्यम बन चुकी है।

YuvaSahakar Desk